Category: उत्तर प्रदेश

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जसवंत के हत्यारोपित तीन गिरफ्तार

सुलतानपुर, 30 अप्रैल । उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर में जसवंत के तीन हत्यारोपिताें को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। युवक की हत्त्या मंगलवार को हुई थी। परिजन हत्यारोपिताें की…

‘तुम्हारी पॉटी का ठेका मैंने नहीं ले रखा है…’ संभल में शौच पर छिड़ा संग्राम, पुलिस के दो धुरंधरों पर गिरी गाज

उत्तर प्रदेश के संभल जिले में पुलिस विभाग का एक अजीबोगरीब विवाद सोशल मीडिया पर खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला ड्यूटी से नदारद रहने और उसके बाद…

गिरगिट भी शर्मा जाए… विधानसभा में विपक्ष पर बरसे योगी आदित्यनाथ, गेस्ट हाउस कांड याद दिलाकर सपा-कांग्रेस को किया ‘निर्वस्त्र’

उत्तर प्रदेश विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला। महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने…

महिला आरक्षण पर यूपी विधानसभा के बाहर सियासी संग्राम, BJP महिला विधायकों का विपक्ष के खिलाफ प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश विधानसभा के एकदिवसीय विशेष सत्र से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की महिला विधायकों ने हाल में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन अधिनियम लोकसभा में पारित नहीं…

UP एक्सप्रेसवे नेटवर्क में बड़ा अपडेट: कुल 15 से अधिक एक्सप्रेस वे, Toll केवल 7 पर, इन 5 पर नहीं चलेगा FASTag एनुअल पास

उत्तर प्रदेश देश का ऐसा राज्य बन गया है जहां एक्सप्रेसवे नेटवर्क सबसे तेजी से विकसित हो रहा है। राज्य में अब 15 से अधिक एक्सप्रेसवे हैं, जिनमें कुछ पूरी…

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यूपी विधान सत्र शुरू होने से पहले महिला आरक्षण पर सत्ता पक्ष और विपक्ष का प्रदर्शन

यूपी विधानसभा में गुरुवार को सत्र शुरू होने से पहले सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक प्रदर्शन करते नजर आये। भाजपा की महिला विधयकों के नेतृत्व में विधायक, मंत्री विधानसभा…

यह चुनाव केवल इस बात तक सीमित नहीं रह गया है कि राज्य सचिवालय नबान्न तक कौन पहुंचेगा, बल्कि यह इस बात पर जनमत संग्रह बन गया है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 15 वर्षों के शासन के बाद भी बंगाल की केंद्रीय राजनीतिक शक्ति बनी रहती हैं या नहीं, और क्या लगातार चौथी जीत उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत विपक्षी चेहरा स्थापित कर सकती है, या फिर भाजपा को राज्य में सत्ता का रास्ता मिल गया। दो चरणों में हुए विधानसभा चुनाव में कुल मतदान 92.47 प्रतिशत दर्ज किया गया। पहले चरण में 93.13 प्रतिशत और दूसरे में 91.66 प्रतिशत मतदान हुआ। यह स्वतंत्रता के बाद का अब तक का सर्वाधिक मतदान है। इसने 2011 के 84 प्रतिशत मतदान के रिकॉर्ड को भी पार कर लिया, जब बनर्जी पहली बार सत्ता में आई थीं और 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासन का अंत हुआ था। बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन की निर्णायक लड़ाई माना जा रहा है। लगातार तीन कार्यकाल और डेढ़ दशक तक सत्ता में रहने के बाद वह न केवल सत्ता बरकरार रखने बल्कि अपने स्थापित राजनीतिक ढांचे की रक्षा के लिए भी संघर्ष कर रही हैं। तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी के बीच अंतर लगभग समाप्त हो चुका है। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ने आक्रामक अभियान चलाया था, तब बनर्जी ने चोटिल होने के बावजूद व्हीलचेयर पर रहकर मुकाबला किया और जीतीं, जिससे उनका कद राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत विपक्षी नेता के रूप में बढ़ा। 2026 की लड़ाई अधिक कठिन मानी जा रही है। इस बार उन्हें सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार के आरोप, भर्ती घोटालों और शासन संबंधी सवालों का सामना करना पड़ रहा है। तृणमूल के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा, “यह चुनाव बंगाल की राजनीतिक पहचान की रक्षा को लेकर है। यदि दीदी फिर जीतती हैं, तो यह साबित होगा कि कल्याणकारी राजनीति और बंगाली अस्मिता सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को हरा सकती है।” दूसरी ओर, भाजपा के लिए बंगाल अब भी अधूरा राजनीतिक लक्ष्य बना हुआ है। पार्टी का मानना है कि वह राज्य में सत्ता हासिल कर अपने “अंतिम वैचारिक मोर्चे” को पार कर सकती है। पार्टी का वोट शेयर 2011 में लगभग चार प्रतिशत से बढ़कर 2019 में करीब 40 प्रतिशत तक पहुंचा और 2021 में उसने 77 सीटें जीतीं, जिससे वह तृणमूल की मुख्य प्रतिद्वंद्वी बन गई। एक भाजपा नेता ने कहा, “हमारे लिए बंगाल अधूरा राजनीतिक मिशन है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर आज तक यह एक राजनीतिक यात्रा को पूरा करने का प्रश्न है।” चुनाव में सबसे बड़ा विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर रहा। राज्यभर में लगभग 91 लाख नाम हटाए जाने से करीब 12 प्रतिशत मतदाता सूची से बाहर हो गए। तृणमूल ने इसे अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, महिलाओं और गरीबों के मताधिकार को प्रभावित करने वाला कदम बताया, जबकि भाजपा ने इसे फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया बताया। विश्लेषकों का मानना है कि एसआईआर ने चुनाव के गणित के साथ-साथ मनोविज्ञान को भी प्रभावित किया है। राजनीतिक विश्लेषक विश्वनाथ चक्रवर्ती ने कहा कि चुनाव केवल संख्याओं से नहीं, बल्कि उससे उत्पन्न मनोवैज्ञानिक प्रभाव से तय होते हैं। मतगणना चार मई को होगी, जब यह स्पष्ट हो जाएगा कि बनर्जी का लंबे समय से चला आ रहा राजनीतिक वर्चस्व बरकरार रहता है या भाजपा अंततः राज्य में सत्ता तक पहुंचने में सफल होती है।

कानपुर के महाराजपुर इलाके में मंगलवार को एक सनसनीखेज घटना में एक तलाकशुदा महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियों ने कथित तौर पर जहर खाकर खुदकुशी कर ली। पुलिस ने…

‘महिला-विरोधी मानसिकता’, CM योगी ने महिला आरक्षण पर सपा और कांग्रेस को घेरा, बोले- ‘इनका चेहरा बेनकाब हुआ’

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “महिला-विरोधी” करार दिया। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि संसद में…

कभी पिछड़ा और ‘बीमारू’ कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश अब एक ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर : PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश को असीमित क्षमताओं वाला प्रदेश करार देते हुए बुधवार को कहा कि कभी पिछड़ा और ‘बीमारू’ कहा जाने वाला यह राज्य अब एक ट्रिलियन…

गंगा एक्सप्रेसवे निर्माण में एक लाख से अधिक किसानों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान : योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में किसानों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक लाख से अधिक किसानों ने इस…

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