विद्या भारती के प्रशिक्षक अर्जुन कुमार ने आदर्श पाठ योजना तैयार करने के बताए गुर, शिक्षण में नवाचार पर दिया जोर
मुजफ्फरनगर। लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय आचार्य योग्यता संवर्धन प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में हुआ। कार्यशाला के अंतिम दिन विद्या भारती के प्रशिक्षक अर्जुन कुमार ने शिक्षकों को पंचपदी अधिगम पद्धति के अनुसार आदर्श पाठ योजना तैयार करने के व्यावहारिक एवं प्रभावी तरीके विस्तार से बताए तथा आधुनिक शिक्षण में नवाचार अपनाने पर विशेष बल दिया।

कार्यशाला का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा, महेश कुमार एवं प्रशिक्षक अर्जुन कुमार ने मां शारदे के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. शर्मा ने प्रशिक्षक अर्जुन कुमार का तिलक लगाकर एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

प्रशिक्षण सत्र में अर्जुन कुमार ने भारत की प्राचीन एवं आधुनिक शिक्षण परंपराओं पर प्रकाश डालते हुए गुरुकुल पद्धति, बुनियादी शिक्षा पद्धति, शांति निकेतन शिक्षा पद्धति, सरस्वती शिशु मंदिर शिक्षा पद्धति तथा पंचपदी अधिगम पद्धति की विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पंचपदी अधिगम पद्धति का मूल उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है, जिससे उनमें ज्ञान के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल और संस्कारों का भी विकास हो सके।
उन्होंने पंचपदी अधिगम पद्धति के पांच प्रमुख घटकों—अधीति, बोध, अभ्यास, प्रयोग एवं प्रसार—की विस्तार से व्याख्या करते हुए पाश्चात्य शिक्षण पद्धति और भारतीय पंचपदी अधिगम पद्धति के बीच के अंतर को भी स्पष्ट किया। इसके बाद उन्होंने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से आदर्श पाठ योजना तैयार करने के आवश्यक बिंदुओं एवं प्रभावी शिक्षण तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी।
समापन अवसर पर प्रधानाचार्य डॉ. अखिलेश कुमार शर्मा ने कहा कि इस दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों के ज्ञान एवं शिक्षण कौशल को अद्यतन करना तथा विद्यालयों में नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देना है। उन्होंने सभी शिक्षकों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान को अपनी कक्षाओं में प्रभावी रूप से लागू करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन महेश कुमार ने किया। अंत में कल्याण मंत्र के साथ कार्यशाला का विधिवत समापन हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे।
