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नैनीताल, 06 जून । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कवि केवल शब्दों के सृजनकर्ता नहीं होते, बल्कि समाज के चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक भी होते हैं। उनकी रचनाएं समाज को दिशा देने, जनचेतना जागृत करने तथा सकारात्मक परिवर्तन लाने का कार्य करती हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि स्वतंत्रता आंदोलन में कवियों और साहित्यकारों की रचनाओं ने लोगों को राष्ट्रहित में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया था। कालाढूंगी तहसील के धनपुर धमोला स्थित नमस्ते कॉर्बेट रिजॉर्ट में ललित फाउंडेशन के पंचम अधिवेशन ‘अभिव्यंजना 5.0’ में पहुंचे मुख्यमंत्री ने अधिवेश का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदियों से साहित्य, संस्कृति और सृजन की भूमि रही है तथा हिमालय की गोद में बसे इस प्रदेश ने अनेक साहित्यकार, कवि और लोकचिंतक दिए हैं, जिन्होंने अपनी लेखनी से समाज को नई दिशा प्रदान की। उन्होंने सुमित्रानंदन पंत, चंद्रकुंवर बर्त्वाल, गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’, शैलेश मटियानी, गौरा पंत ‘शिवानी’ और मोहन उप्रेती के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखंड की साहित्यिक परंपरा आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा दे रही है।

मुख्यमंत्री ने डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री अशोक चक्रधर और डॉ. हरिओम पंवार सहित विभिन्न साहित्यकारों की रचनात्मक भूमिका की सराहना की तथा समाज और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कवियों एवं साहित्यकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में कालाढूंगी के विधायक बंशीधर भगत, डॉ. कुमार विश्वास, पद्मश्री अशोक चक्रधर, डॉ. हरिओम पंवार सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों से आये कवि, साहित्यकार और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

By editor

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