नीरज प्रजापति

सपा प्रदेश अध्यक्ष के बयान पर भड़के भारतीय अति पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बोले कि अति पिछड़ों के दम पर मिली राजनीतिक ताकत, अपमान हुआ तो चुनाव में मिलेगा जवाब
मुजफ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल के मुजफ्फरनगर दौरे के दौरान दिए गए कथित बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय अति पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि अति पिछड़े समाज के सम्मान और स्वाभिमान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मोहन प्रजापति ने कहा कि सपा नेताओं की ओर से अति पिछड़े समाजों को लेकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह केवल एक वर्ग का नहीं बल्कि उन तमाम पिछड़े और अति पिछड़े समाजों का अपमान है, जिन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी भागीदारी से राजनीतिक दलों को मजबूती दी है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी आज जिस राजनीतिक स्थिति में पहुंची है, उसमें पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 37 सांसदों की सफलता के पीछे जिन सामाजिक वर्गों का समर्थन रहा, उन्हीं वर्गों को लेकर यदि अपमानजनक टिप्पणी की जाएगी तो इसका राजनीतिक जवाब भी दिया जाएगा।
मोहन प्रजापति ने सपा नेतृत्व पर निशाना साधते हुए कहा कि एक ओर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लगातार पीडीए की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर पार्टी के नेताओं के बयानों से पिछड़े और अति पिछड़े समाजों में नाराजगी पैदा हो रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पार्टी वास्तव में पिछड़ों को राजनीतिक हिस्सेदारी देने के लिए गंभीर है तो उसे टिकट वितरण और संगठन में पिछड़े समाजों की वास्तविक भागीदारी का आंकड़ा सार्वजनिक करना चाहिए।
उन्होंने विशेष रूप से पाल, प्रजापति, कश्यप और सैनी समेत अति पिछड़े समाजों की राजनीतिक भागीदारी को लेकर सपा नेतृत्व से जवाब मांगा। उनका कहना था कि केवल नारों और राजनीतिक मंचों पर पीडीए की चर्चा करने से सामाजिक न्याय स्थापित नहीं होगा, बल्कि इसके लिए सत्ता, संगठन और टिकट वितरण में वास्तविक भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी।
मोहन प्रजापति ने कहा कि अति पिछड़े समाज अब केवल चुनाव के समय याद किए जाने वाले वोट बैंक नहीं हैं। यह वर्ग अपने राजनीतिक अधिकार, सम्मान और हिस्सेदारी को लेकर जागरूक हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सपा नेताओं ने अति पिछड़ों के प्रति कथित तौर पर अपमानजनक रवैया जारी रखा तो आगामी विधानसभा चुनाव में समाज के लोग अपने राजनीतिक हितों के आधार पर निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होंगे।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि किसी भी समाज का सम्मान केवल भाषणों में नहीं बल्कि उसके प्रतिनिधित्व और अधिकारों में दिखाई देता है। उन्होंने सपा नेतृत्व से अति पिछड़े समाजों के प्रति अपने रुख को स्पष्ट करने और कथित विवादित टिप्पणियों पर स्थिति साफ करने की मांग की।
मोहन प्रजापति ने कहा कि “अति पिछड़ों का सम्मान होगा तो राजनीतिक सम्मान मिलेगा, लेकिन अपमान की राजनीति का जवाब भी उसी लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा।” उन्होंने अति पिछड़ा समाज से भी राजनीतिक रूप से जागरूक होकर अपने अधिकारों और हिस्सेदारी के मुद्दे पर एकजुट रहने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में अति पिछड़ा वर्ग अपनी राजनीतिक ताकत का अहसास कराने के लिए गांव-गांव संवाद करेगा और समाज के बीच यह मुद्दा उठाया जाएगा कि कौन-सा राजनीतिक दल वास्तव में अति पिछड़ों को सम्मान, प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी देने के लिए तैयार है।
मोहन प्रजापति ने अंत में कहा कि यदि सपा नेतृत्व वास्तव में पीडीए के माध्यम से पिछड़े, दलित और वंचित समाजों को आगे बढ़ाना चाहता है तो सबसे पहले उसे अपनी पार्टी के नेताओं की भाषा और राजनीतिक आचरण में समानता लानी होगी। अति पिछड़ों के सम्मान से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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