नीरज प्रजापति
7 अक्टूबर तक सरकार ने नहीं दिया ठोस लिखित फैसला तो प्रदेशभर के एक लाख से अधिक एनएचएम संविदा कर्मचारी करेंगे कार्य बहिष्कार, वर्षों पुराने समझौतों को लागू कराने के लिए मुजफ्फरनगर से उठी आर-पार की आवाज
मुजफ्फरनगर। वर्षों से लंबित मांगों और सरकार के साथ हुए लिखित समझौतों के लागू न होने से नाराज राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने अब आंदोलन को निर्णायक मोड़ देने का ऐलान कर दिया है। मंगलवार को जिला चिकित्सालय के आयुष विंग मुजफ्फरनगर विभाग में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि 7 अक्टूबर तक सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस एवं लिखित निर्णय नहीं लिया तो 8 अक्टूबर से प्रदेशभर के एक लाख से अधिक एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी सरकार से टकराव के लिए नहीं, बल्कि वर्षों पहले किए गए लिखित समझौतों को लागू कराने के लिए है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मयंक ठाकुर के आह्वान पर शाखा मुजफ्फरनगर के पदाधिकारियों ने वर्षों से लंबित मांगों, पूर्व आंदोलनों के दौरान सरकार एवं अधिकारियों के साथ हुए समझौतों तथा वर्तमान आंदोलन की स्थिति को सामने रखा। जिला अध्यक्ष डॉ. सचिन जैन ने कहा कि कर्मचारियों को बार-बार आश्वासन मिले, लिखित समझौते हुए, लेकिन जब उन्हें लागू करने की बारी आई तो मामला वर्षों तक फाइलों में अटका रहा। उन्होंने वर्ष 2016 के आंदोलन का हवाला देते हुए बताया कि उस समय कर्मचारियों ने 15 दिन की अनवरत हड़ताल और 10 दिन की भूख हड़ताल की थी। इसके बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव स्वास्थ्य के साथ लिखित समझौता हुआ था। समझौते में एनएचएम कर्मचारियों को नियमित भर्तियों में अतिरिक्त अंक दिए जाने की मांग पर सहमति बनी थी और इसे शीघ्र लागू करने की बात कही गई थी। कर्मचारियों का आरोप है कि करीब एक दशक गुजरने के बाद भी इस संबंध में प्रभावी आदेश जारी नहीं हुआ। डॉ. सचिन जैन ने कहा कि सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस लाभ की उम्मीद में कर्मचारियों ने वर्षों तक इंतजार किया, उस दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारी निर्धारित आयु सीमा से बाहर हो गए। ऐसे में पुराने समझौते को लागू करने में हुई देरी ने कर्मचारियों के सामने नई परेशानी खड़ी कर दी है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 के समझौते में अन्य राज्यों की तर्ज पर एनएचएम कर्मचारियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात भी कही गई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में संविदा कर्मचारियों की समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं। डॉ. राहुल वर्मा ने वर्ष 2021 के आंदोलन के बाद हुए समझौते का मुद्दा उठाते हुए कहा कि उस समय प्रत्येक तीन वर्ष पर 10 प्रतिशत लॉयल्टी बोनस और प्रत्येक वर्ष 10 प्रतिशत इंक्रीमेंट दिए जाने की बात कही गई थी। कर्मचारियों का कहना है कि समझौते के बावजूद इन बिंदुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। महामंत्री मणिकांत त्यागी ने कहा कि बार-बार समझौते और आश्वासन कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा बन चुके हैं। अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि सरकारी आदेश चाहिए। डॉ. सुदेश वर्मा ने चेतावनी दी कि यदि 7 अक्टूबर तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ तो 8 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारी प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके आंदोलन का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है। आंदोलन को लेकर कर्मचारी पिछले करीब 15 दिनों से जनप्रतिनिधियों से भी संपर्क कर रहे हैं। इस दौरान कोषाध्यक्ष डॉ. फैसल सिद्दीकी ने बताया कि कर्मचारियों ने विभिन्न मंत्रियों और विधायकों से मुलाकात कर अपनी समस्याएं सरकार तक पहुंचाने का आग्रह किया है। जिला महिला चिकित्सालय के संजय कुमार ने बताया कि राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार कपिल देव अग्रवाल द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया गया है। डॉ. शमशेर ने बताया कि कर्मचारियों का प्रतिनिधिमंडल पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान से भी मिला। उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक से फोन पर वार्ता कर मांगों के समाधान में सहयोग का आग्रह किया। स्टाफ नर्स डिंपल रानी ने कहा कि कर्मचारियों द्वारा लखनऊ में पूर्व में दिए गए नियमितीकरण और सुविधाओं संबंधी आश्वासनों का भी हवाला दिया जाता रहा है। उन्होंने कहा कि वर्षों बाद भी स्थायी समाधान नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत रवि कुमार ने कहा कि कर्मचारियों का भरोसा तभी लौटेगा जब सरकार स्पष्ट और लिखित आदेश जारी करेगी। संगठन ने दोहराया कि कर्मचारी टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपने अधिकारों और पूर्व समझौतों के क्रियान्वयन के लिए अब निर्णायक संघर्ष से पीछे हटने वाले नहीं हैं। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य रूप से डॉ. सचिन जैन, डॉ. राहुल वर्मा, डॉ. फैसल सिद्दीकी, डॉ. सुदेश वर्मा, डॉ. शमशेर, स्टाफ नर्स डिंपल रानी, डाटा ऑपरेटर संजय कुमार, रवि कुमार, डाइटिशियन नेहा त्यागी सहित संगठन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में एनएचएम संविदा कर्मचारी मौजूद रहे।
