नीरज प्रजापति

दक्षिणी कृष्णापुरी में बिजली के ट्रांसफार्मर के चारों ओर कचरे का अंबार, जनता की लापरवाही या सफाई व्यवस्था की अनदेखी ने खोली व्यवस्था की पोल।

मुजफ्फरनगर। शहर की दक्षिणी कृष्णापुरी में स्वच्छता व्यवस्था को मुंह चिढ़ाता एक ऐसा नजारा सामने आया है, जिसने ग्रीन भारत-क्लीन भारत जैसे स्वच्छता अभियानों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां बिजली के ट्रांसफार्मर को ही लोगों ने कूड़ेदान बना दिया है। ट्रांसफार्मर के नीचे कूड़े के ढेर लगे हैं और गंदगी लगातार बढ़ती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि बिजली का ट्रांसफार्मर अब विद्युत आपूर्ति के साथ-साथ कूड़ा जमा करने का केंद्र भी नजर आने लगा है।
दक्षिणी कृष्णापुरी में सड़क किनारे लगे ट्रांसफार्मर के आसपास गंदगी का आलम देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्वच्छता को लेकर लोगों में कितनी जागरूकता है। आसपास रहने वाले लोग या राहगीर कूड़ा निर्धारित स्थान पर डालने के बजाय ट्रांसफार्मर के आसपास फेंकते दिखाई देते हैं। देखते ही देखते छोटी-छोटी गंदगी कचरे के बड़े ढेर में तब्दील हो जाती है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस गंदगी के लिए जिम्मेदार किसे माना जाए? क्या यह जनता की नासमझी और गैरजिम्मेदाराना रवैये का नतीजा है या फिर नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों की अनदेखी का? यदि लोग खुले में कूड़ा फेंक रहे हैं तो उन्हें रोकने और जागरूक करने की जिम्मेदारी भी संबंधित व्यवस्था की है। वहीं यदि यहां नियमित सफाई होती है, तो फिर कूड़े के ढेर जमा होने की नौबत आखिर क्यों आई?
स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदगी के कारण आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है। कूड़े के ढेर से दुर्गंध फैलने के साथ ही आवारा पशुओं का जमावड़ा भी बढ़ सकता है। इसके अलावा बिजली के ट्रांसफार्मर के आसपास कूड़ा जमा होना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। ज्वलनशील कचरा विद्युत उपकरणों के नजदीक पड़ा रहना सुरक्षा के लिहाज से भी चिंता का विषय बन सकता है।
एक ओर शहर को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं अभियानों की तस्वीर दक्षिणी कृष्णापुरी में कूड़े के ढेर के रूप में सामने आ रही है। जरूरत इस बात की है कि लोग अपनी जिम्मेदारी समझें और सार्वजनिक स्थानों को कूड़ाघर बनाने से बाज आएं। साथ ही नगर पालिका को भी ऐसे स्थानों की नियमित सफाई, निगरानी और लोगों को जागरूक करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।

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