नीरज प्रजापति
रुड़की रोड के मिर्च मसाला रेस्टोरेंट में प्रेसवार्ता, लेखक ने PMO से लेकर CBI, ED, CVC और यूपी शासन तक की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल; QR कोड में दस्तावेजी सबूत होने का दावा
मुजफ्फरनगर। व्यवस्था के भीतर कथित भ्रष्टाचार, अफसरशाही की कार्यप्रणाली और जांच एजेंसियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए लेखक ने सोमवार को अपनी नई पुस्तक ‘संविधान का चीरहरण (व्यवस्था के भीतर का अंधेरा)’ का विमोचन प्रेसवार्ता के माध्यम से किया। रुड़की रोड स्थित मिर्च मसाला रेस्टोरेंट में लेखक जय भगवान अग्रवाल (पटवारी) ने प्रेस वार्ता का का आयोजन किया। इस दौरान लेखक जय भगवान अग्रवाल ने एक के बाद एक गंभीर आरोप सामने रखते हुए दावा किया कि पुस्तक में देश और प्रदेश के महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थानों, जांच एजेंसियों तथा सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य उपलब्ध कराए गए हैं।
आरोप है कि प्रधानमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय, केंद्रीय जांच ब्यूरो, केंद्रीय सतर्कता आयोग, प्रवर्तन निदेशालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रपति सचिवालय, भारत सरकार के प्रमुख सचिव (न्याय), मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन और राजस्व परिषद लखनऊ समेत विभिन्न संस्थानों एवं कार्यालयों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आरोप है कि पारदर्शिता, जवाबदेही, भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस, कानून का शासन, सुशासन, मानवाधिकारों की रक्षा और निष्पक्ष न्याय जैसे मुद्दे व्यवहारिक स्तर पर गंभीर चुनौतियों से जूझ रहे हैं। इस दौरान लेखक जय भगवान अग्रवाल ने दावा किया कि उन्होंने आईएएस और पीसीएस अधिकारियों से जुड़े कथित अनियमितताओं और अपराधों के सैकड़ों लिखित दस्तावेज एवं साक्ष्य विभिन्न जांच एजेंसियों तथा केंद्र और प्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण कार्यालयों को उपलब्ध कराए हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई करने के बजाय प्रभावशाली अधिकारियों और कथित रूप से उनसे जुड़े लोगों को संरक्षण दिया गया। आरोप है कि सरकारी संपत्तियों पर कथित कब्जे के प्रयास, किसानों की गन्ने की फसल से जुड़े विवाद, फर्जी मुकदमों, कथित फर्जी जांच रिपोर्ट और विवेचनाओं तथा अधिकारियों और भूमाफियाओं के कथित गठजोड़ होने का दावा किया हैं। उन्होंने सभी आरोपों से संबंधित सरकारी दस्तावेज पुस्तक में दिए गए QR कोड के माध्यम से उपलब्ध होने का दावा किया है। उन्होंने कहा कि कोई भी पाठक QR कोड स्कैन कर दस्तावेज देखने, पढ़ने और डाउनलोड करने के साथ उनकी स्वतंत्र रूप से जांच कर सकते हैं।
सिस्टम पर सवाल उठाना ही मेरी लड़ाई: लेखक जय भगवान अग्रवाल
जय भगवान अग्रवाल ने कहा कि पुस्तक का उद्देश्य केवल किसी एक घटना को सामने रखना नहीं, बल्कि यह सवाल उठाना है कि संविधान और कानून में निर्धारित जवाबदेही वास्तविक प्रशासनिक व्यवस्था में किस हद तक लागू हो रही है। उनका कहना है कि ईमानदारी से कार्य करने वाले अधिकारियों- कर्मचारियों को संरक्षण और भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है। उन्होंने अपनी पिछली पुस्तक अफसरशाही (एक अनसुना सच) का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों पुस्तकों में दस्तावेजों और घटनाक्रमों के माध्यम से व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। इस दौरान उन्होंने अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए कहा कि पुस्तक के प्रकाशन और प्रेसवार्ता के बाद यदि उन्हें अथवा उनके परिवार को जान-माल का नुकसान होता है या झूठे मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की होगी।
