भारतीय योग संस्थान की साप्ताहिक योग चर्चा में पंचक्लेशों का किया गहन विश्लेषण, योग साधकों को आत्मज्ञान और जीवन के वास्तविक उद्देश्य का कराया बोध

मुजफ्फरनगर। भारतीय योग संस्थान के निशुल्क योग साधना केंद्र, ग्रीनलैंड मॉडर्न जूनियर हाई स्कूल में आयोजित साप्ताहिक योग चर्चा आध्यात्मिक चिंतन और योग दर्शन का प्रेरणादायी संगम बन गई। कार्यक्रम में भारतीय योग संस्थान के प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं जनपद प्रभारी योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने योग दर्शन के महत्वपूर्ण विषय ‘पंचक्लेश’ पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि अविद्या ही सभी क्लेशों की जननी है। जब तक मनुष्य अविद्या के अंधकार से बाहर नहीं निकलता, तब तक वह जन्म-मरण और दुखों के बंधन से मुक्त नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि महर्षि पतंजलि के योग दर्शन में बताए गए अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष और अभिनिवेश ये पांच क्लेश जीवात्मा को संसार के बंधनों में जकड़े रखते हैं। यही क्लेश मनुष्य के दुखों का मूल कारण हैं और मोक्ष प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा बनते हैं। योगाचार्य ने कहा कि इन सभी क्लेशों का मूल कारण केवल अविद्या है, इसलिए इसे समस्त क्लेशों की जननी कहा गया है।
उन्होंने बताया कि महर्षि पतंजलि का अष्टांग योग इन पंचक्लेशों को समाप्त करने का सर्वोत्तम और वैज्ञानिक मार्ग है। योगाभ्यास, ध्यान, संयम और आत्मचिंतन के माध्यम से साधक धीरे-धीरे इन मानसिक विकारों पर विजय प्राप्त कर सकता है और आत्मकल्याण की ओर अग्रसर होता है।
योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने अविद्या की व्याख्या करते हुए बताया कि अनित्य को नित्य मानना, अशुद्ध को शुद्ध समझना, दुख को सुख मान लेना तथा अनात्म को आत्मा समझ लेना ही अविद्या है। यही मिथ्या ज्ञान मनुष्य को सत्य से दूर ले जाता है और उसे भ्रम तथा दुखों में उलझाए रखता है। उन्होंने कहा कि अविद्या के कारण ही अन्य चारों क्लेश जन्म लेते हैं और ये प्रसुप्त, तनु, विच्छिन्न तथा उदार अवस्थाओं में मनुष्य के भीतर सक्रिय रहते हैं।
कार्यक्रम में जिला प्रधान राज सिंह पुंडीर ने कहा कि मिथ्या ज्ञान ही अविद्या का स्वरूप है। उन्होंने बताया कि आत्मा के स्थान पर मन और शरीर को ही अपना वास्तविक स्वरूप मान लेना अस्मिता है, जिससे अहंकार उत्पन्न होता है। सांसारिक वस्तुओं और विषयों के प्रति अत्यधिक मोह राग कहलाता है, जबकि स्वार्थ सिद्ध न होने पर उत्पन्न ईर्ष्या और घृणा द्वेष का रूप ले लेती है। वहीं मृत्यु का भय अभिनिवेश क्लेश कहलाता है, जो मनुष्य को मानसिक रूप से कमजोर बनाता है।
उन्होंने सभी योग साधकों से नियमित योग, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास करने का आह्वान करते हुए कहा कि योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और मोक्ष की दिशा में बढ़ने का सशक्त साधन भी है।
योग चर्चा के दौरान उपस्थित साधकों ने योग दर्शन से जुड़े विभिन्न विषयों पर जिज्ञासाएं भी रखीं, जिनका योगाचार्यों ने सरल और प्रभावी ढंग से समाधान किया। कार्यक्रम का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मक विचारों से ओत-प्रोत रहा।
इस अवसर पर यशपाल बरवाला, जिला मंत्री राजीव रघुवंशी, क्षेत्रीय प्रधान नीरज बंसल, केंद्र प्रमुख कविंद्र बालियान, देवेंद्र बालियान, मनोज चौधरी, रविंद्र धीमान, अंकित, गौरव, डॉ. अक्षय बालियान, वीर सिंह, रविता भारती, मंजू चौधरी सहित बड़ी संख्या में योग साधक एवं साधिकाएं उपस्थित रहे।

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