राष्ट्रीय जाट महासभा की बैठक में बड़ा फैसला, केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण लागू नहीं होने पर दिल्ली में देशव्यापी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी

नीरज प्रजापति 

मुजफ्फरनगर/सोनीपत। जाट आरक्षण के मुद्दे पर राष्ट्रीय जाट महासभा ने बड़ा राजनीतिक और सामाजिक संदेश देते हुए केंद्र सरकार के सामने आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर निर्णायक आंदोलन का एलान कर दिया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि 12 अक्टूबर 2026 से पहले जाट समाज को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण नहीं दिया गया तो देशभर से हजारों की संख्या में जाट समाज के लोग दिल्ली पहुंचकर किसान घाट से संसद भवन तक शांतिपूर्ण पैदल मार्च करेंगे।
यह महत्वपूर्ण निर्णय रविवार को सोनीपत स्थित ओपी जिंदल यूनिवर्सिटी के सामने ट्यूलिप ग्रांड सोसायटी के सभागार में आयोजित राष्ट्रीय जाट महासभा भारत की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। बैठक में संगठन के राष्ट्रीय, प्रदेश और विभिन्न प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों ने भाग लिया।


राष्ट्रीय अध्यक्ष सचिन सरोहा ने कहा कि जाट समाज सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में लगातार पिछड़ता जा रहा है। ऐसे में समाज के युवाओं को समान अवसर दिलाने के लिए केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण आवश्यक है। उनका कहना था कि आरक्षण से समाज के युवाओं को रोजगार और प्रतिनिधित्व मिलेगा, जिससे उनकी स्थिति मजबूत होगी।
बैठक में केंद्र सरकार से मांग की गई कि 12 अक्टूबर से पहले जाट समाज को केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण देने का निर्णय लिया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांग पूरी नहीं हुई तो 12 अक्टूबर को दिल्ली स्थित चौधरी चरण सिंह स्मृति स्थल किसान घाट से संसद भवन तक विशाल पैदल मार्च निकालकर सरकार के समक्ष अपनी मांगों को मजबूती से रखा जाएगा।
बैठक में केवल आरक्षण आंदोलन ही नहीं, बल्कि संगठन को और अधिक मजबूत बनाने पर भी विस्तृत चर्चा हुई। महिला सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए संगठन में महिलाओं को 33 प्रतिशत भागीदारी देने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। साथ ही विभिन्न राज्यों में संगठन विस्तार और जनसंपर्क अभियान को तेज करने की रणनीति तैयार की गई।


बैठक का संचालन उत्तर प्रदेश के प्रदेश प्रवक्ता सत्येंद्र मलिक ने किया। कार्यक्रम में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब समेत विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारियों ने भाग लिया। इनमें रामकिशन पावड़िया, कुन्नीलाल ओला, ऋषिपाल नैन, धर्मेंद्र काठा, कपिल चौधरी, मोहित मलिक, नरेश लांबा, तन्मय चौधरी, आशा चौधरी, सुनीता चौधरी, मदनलाल दांतेल, सुभाष खेरवा, विजेंद्र सिंह, अशोक मलिक, क्या पुनिया, कुलदीप सिंह सांगवान, रिशा नैन, किरण चौधरी, गुरजीत सिंह, सुखजंत सिंह, अमित चौधरी, अनुकूल सिंह, अंकुर मलिक और बालकिशन कुंतल सहित बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
बैठक के बाद संगठन ने संकेत दिए कि आने वाले दिनों में देशभर में जनसंपर्क अभियान चलाकर जाट समाज को एकजुट किया जाएगा, ताकि अक्टूबर में प्रस्तावित आंदोलन को व्यापक स्वरूप दिया जा सके। इससे साफ है कि जाट आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है।

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