खतौली। ज्ञान भारतम् मिशन के अन्तर्गत जिलाधिकारी उमेश मिश्रा के निर्देशन एवं जिला मुख्य विकास अधिकारी कण्डारकर कमल किशोर देशभूषण के मार्गदर्शन में प्राचीन पांडुलिपियों के सर्वेक्षण का अभियान गति पकड़ रहा है। समिति के सदस्य डॉ चन्द्रमोहन शर्मा ने खतौली नगर के मंदिरों में उपलब्ध पांडुलिपियों का निरीक्षण कर उन्हें चिन्हित किया है, जिनका बाद में डिजिटलीकारण कराने वाली पीढियों को प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ा जाएगा।
बड़े बाजार में स्थित जैन मंदिर के मंत्री ने संरक्षित एवं संकलित पांडुलिपियों के दर्शन करवायें ये पांडुलिपि 100 वर्ष से भी अधिक प्राचीन हैं। इस अवसर पर डॉ ज्योति जैन ने कहा कि विश्व की सबसे अधिक पांडुलिपियां भारत में है। उन्होंने बताया कि धर्म ,दर्शन ,विज्ञान ,चिकित्सा गणित ,वास्तु सहित सभी विषयों में पांडुलिपियां उपलब्ध हैं, जो हमारी महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर हैं। डॉ चन्द्रमोहन शर्मा ने बताया कि अभिलेखागार पुस्तकालय एवं निजी संग्रह में पांडुलिपियों का संग्रह बहुतायत में है। धर्म दर्शन की अनेक पांडुलिपियों से विदेशी भी आकर्षित हुए । जर्मन में अच्छी खासी मात्रा में भारतीय पांडुलिपियां हैं। ज्ञान भारत मिशन के इस कार्य में सभी को सहयोग प्रदान करना चाहिए क्योंकि यह पांडुलिपियां हमारी सांस्कृतिक विरासत है और इनका संरक्षण और संवर्धन करना प्र‌‌त्येक भारतीय नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने जनपद वासियों से अपील की है यदि उनके पास अथवा परीचितों के पास 75 वर्षों से अधिक प्राचीन कोई पांडुलिपि ताड़ पत्र या ताम्रपत्र आदि धरोहर के रूप में विद्यमान है तो उसके बारे में समिति के सदस्यों को अवगत करायें ताकि उस धरोहर को संरक्षित करने का कार्य किया जा सके।

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