नीरज प्रजापति

 

महाराणा प्रताप के सम्मान में कोई कमी नहीं, लेकिन जैन तीर्थ की पहचान मिटाना स्वीकार नहीं: गौरव जैन
मुज़फ्फरनगर। वहलना चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक किए जाने को लेकर अब जैन समाज में विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। चौक के नाम परिवर्तन को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने इसे केवल नाम बदलने का विषय न मानते हुए वहलना की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा मामला बताया है। जैन समाज का कहना है कि वह महाराणा प्रताप के शौर्य, पराक्रम और राष्ट्रभक्ति का पूरा सम्मान करता है, लेकिन वहलना जैसे विश्वप्रसिद्ध जैन तीर्थ के समीप स्थित चौक की पुरानी पहचान को समाप्त किया जाना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जैन समाज के लोगों का कहना है कि वहलना चौक केवल आवागमन का एक सामान्य स्थान नहीं है, बल्कि इसकी पहचान वर्षों से वहलना स्थित जैन तीर्थ के साथ जुड़ी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी श्रद्धालु अतिशय क्षेत्र वहलना पहुंचते हैं। ऐसे में चौक का नाम बदलने से तीर्थ क्षेत्र से जुड़ी उसकी पारंपरिक पहचान प्रभावित होने की आशंका समाज के लोगों ने जताई है।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि नाम परिवर्तन के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए और क्षेत्र की धार्मिक एवं ऐतिहासिक पहचान को ध्यान में रखते हुए चौक का नाम “पारसनाथ चौक, वहलना” रखा जाना चाहिए।

महाराणा प्रताप के सम्मान में कोई कमी नहीं, विरोध नाम परिवर्तन की प्रक्रिया से

जैन समाज की ओर से स्पष्ट किया गया कि उनके विरोध को महाराणा प्रताप के प्रति असम्मान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। समाज के लोगों ने कहा कि महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के महान योद्धा और स्वाभिमान के प्रतीक हैं तथा उनके शौर्य एवं त्याग के प्रति जैन समाज भी सम्मान का भाव रखता है।
समाज का विरोध केवल इस बात को लेकर है कि वहलना की पहचान जिस धार्मिक विरासत से बनी है, उससे जुड़े प्रमुख स्थल का नाम अचानक बदल दिया जाए। प्रतिनिधियों के अनुसार किसी महापुरुष के नाम पर चौक का नाम रखना सम्मान की बात हो सकती है, लेकिन इसके लिए किसी धार्मिक स्थल से लंबे समय से जुड़ी स्थानीय पहचान को समाप्त करना उचित नहीं है।

वहलना की पहचान से नहीं होने देंगे समझौता

जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि वहलना केवल एक स्थान का नाम नहीं बल्कि जैन धर्म की आस्था, इतिहास और श्रद्धा का महत्वपूर्ण केंद्र है। अतिशय क्षेत्र वहलना से देशभर के जैन श्रद्धालुओं की भावनाएं जुड़ी हुई हैं। समाज का कहना है कि जब श्रद्धालु मुज़फ्फरनगर पहुंचते हैं तो वहलना तीर्थ की ओर जाने वाले मार्ग में वहलना चौक एक प्रमुख पहचान के रूप में सामने आता है। वर्षों से प्रचलित नाम स्थानीय लोगों की जुबान पर ही नहीं बल्कि धार्मिक यात्राओं और सामाजिक गतिविधियों में भी अपनी अलग पहचान रखता है। प्रतिनिधियों ने कहा कि धार्मिक स्थलों से जुड़े नामों का अपना ऐतिहासिक महत्व होता है। इसलिए किसी भी प्रकार का परिवर्तन करने से पहले संबंधित समाज और क्षेत्र के लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखना आवश्यक है।

गौरव जैन ने खोला मोर्चा, बोले आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

जैन एकता मंच युवा शाखा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव जैन ने नाम परिवर्तन के निर्णय पर कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि वहलना चौक का नाम बदलने का फैसला जैन समाज की भावनाओं से जुड़ा गंभीर विषय है।
उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप के प्रति जैन समाज के मन में पूरा सम्मान है, लेकिन वहलना की धार्मिक पहचान को किसी दूसरे नाम में समाहित कर देना उचित नहीं है। उनका कहना है कि वहलना जैन समाज के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है और चौक का नाम भी उसी पहचान से जुड़ा हुआ है। गौरव जैन ने कहा कि समाज अपनी मांग को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से शासन-प्रशासन के समक्ष रखेगा। यदि मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो कांवड़ यात्रा के बाद जैन समाज के लोग बड़ी संख्या में एकजुट होकर आंदोलन की राह अपनाने के लिए मजबूर होंगे।

अब सवाल सिर्फ नाम का नहीं, पहचान का है 

गौरव जैन ने कहा कि महापुरुषों का सम्मान अपनी जगह है और धार्मिक विरासत की रक्षा अपनी जगह। दोनों को एक-दूसरे के विरोध में खड़ा किए बिना ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे किसी भी समाज की भावनाएं आहत न हों।

कांवड़ यात्रा के बाद आंदोलन की रणनीति तैयार करने का ऐलान

जैन समाज ने फिलहाल कांवड़ यात्रा के मद्देनजर अपने आंदोलन को आगे बढ़ाने के बजाय प्रशासन के समक्ष अपनी बात रखने का निर्णय लिया है। समाज के पदाधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि निर्धारित समय में नाम परिवर्तन के फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो कांवड़ यात्रा के बाद बैठक कर आंदोलन की विस्तृत रणनीति तैयार की जाएगी। समाज के लोगों ने कहा कि आंदोलन का स्वरूप पूरी तरह लोकतांत्रिक होगा। इसमें ज्ञापन, धरना, प्रदर्शन और जनजागरण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी मांग शासन एवं प्रशासन तक पहुंचाई जाएगी।

पारसनाथ चौक, वहलना नाम रखने की मांग

जैन समाज की मुख्य मांग है कि वर्तमान नाम परिवर्तन के निर्णय को वापस लिया जाए और चौक का नाम “पारसनाथ चौक, वहलना” रखा जाए। समाज के लोगों का तर्क है कि यह नाम क्षेत्र की धार्मिक पहचान, जैन आस्था और वहलना तीर्थ की परंपरा को अधिक मजबूती से प्रदर्शित करेगा। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि चौक के नाम में वहलना और पारसनाथ का उल्लेख रहता है तो बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को भी तीर्थ क्षेत्र की पहचान आसानी से समझ में आएगी।

भाजपा सरकार और नगरपालिका प्रशासन पर उठाए सवाल

नाम परिवर्तन के मुद्दे को लेकर जैन समाज के कुछ प्रतिनिधियों ने भाजपा सरकार और नगरपालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि भाजपा को जैन समाज की धार्मिक भावनाओं और समाज के योगदान को ध्यान में रखते हुए इस मामले में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। समाज के लोगों ने कहा कि यह मामला किसी राजनीतिक दल के समर्थन या विरोध से कहीं बड़ा है। उनके अनुसार यह धार्मिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने का सवाल है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते और बातचीत के माध्यम से समाधान चाहते हैं। उनका स्पष्ट मत है कि यदि प्रशासन उनकी भावनाओं को समझते हुए निर्णय पर पुनर्विचार करता है तो विवाद को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। लेकिन यदि मांग को नजरअंदाज किया गया तो कांवड़ यात्रा के बाद आंदोलन को व्यापक रूप देने की चेतावनी भी दी गई है।

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