from-the-seventh-century-ganga

नोएडा, 27 सितंबर । सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा से लेकर दसवीं सदी की गरुणारूढ़ लक्ष्मी नारायण और 12वीं सदी की सरस्वती की मूर्ति उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में संस्कृति विभाग का आउटलेट प्रदेश की सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को सामने ला रहा है। इंडिया एक्सपो मार्ट में सजी प्रदर्शनी में प्राचीन मूर्तियों, डिजिटल पांडुलिपियों, चित्रों और ऐतिहासिक स्थलों की प्रतिकृतियों के जरिए उत्तर प्रदेश की कला और संस्कृति के विभिन्न कालखंडों को प्रदर्शित किया गया है। इसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। आउटलेट का मुख्य द्वार प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार और ब्रह्मांड द्वार की प्रतिकृति के रूप में तैयार किया गया है, जो आगंतुकों के लिए आकर्षक सेल्फी प्वाइंट बना हुआ है।

प्रदर्शनी में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त प्राचीन प्रतिमाओं को प्रदर्शित किया गया है। मिर्जापुर से प्राप्त दसवीं सदी की गरुणारूढ़ लक्ष्मी नारायण की मूर्ति, सुल्तानपुर से मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा, कानपुर के रानीपुर से प्राप्त दसवीं सदी की महेश्वर की मूर्ति, अल्मोड़ा से मिली 11वीं सदी की भगवान विष्णु की प्रतिमा और गोरखपुर से प्राप्त 12वीं सदी की सरस्वती की मूर्ति लोगों का ध्यान खींच रही है। सातवीं सदी की गंगा की प्रतिमा भी विशेष आकर्षण बनी हुई है।

इन प्रतिमाओं के जरिए अलग-अलग कालखंडों में विकसित भारतीय शिल्पकला, धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक जीवन की झलक दिखाई गई है। विद्यार्थियों और युवाओं में इन प्राचीन धरोहरों को लेकर विशेष जिज्ञासा देखी जा रही है। कई युवा मूर्तियों के इतिहास और उनके निर्माण काल से जुड़ी जानकारी भी ले रहे हैं।

ब्रज की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शनी में विशेष स्थान दिया गया है। आउटलेट के प्रवेश द्वार को प्रेम मंदिर के मुख्य द्वार और ब्रह्मांड द्वार की प्रतिकृति के तौर पर तैयार किया गया है। इसकी भव्य संरचना आगंतुकों को आकर्षित कर रही है और यहां लोग तस्वीरें खींचने के साथ सेल्फी लेते नजर आ रहे हैं। इस तरह यह द्वार प्रदर्शनी के सांस्कृतिक संदेश के साथ आकर्षण का केंद्र भी बन गया है।

नई दिल्ली से प्रदर्शनी देखने पहुंचीं कक्षा 11 की छात्रा आयुषी ने बताया कि उन्होंने अब तक ऐसी प्राचीन मूर्तियां पाठ्य-पुस्तकों में चित्रों के रूप में ही देखी थीं। यहां उन्हें इन्हें सामने से देखने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रदर्शनी से विद्यार्थियों को भारतीय और सनातन संस्कृति को करीब से समझने में मदद मिलती है।

राज्य ललित कला अकादमी की ओर से विभिन्न चित्रकारों की कलाकृतियां भी प्रदर्शित की गई हैं। चित्रों में सांस्कृतिक विरासत के साथ वर्तमान समय की कला को भी स्थान दिया गया है। यहां चित्रकार मौके पर ही आगंतुकों के पोर्ट्रेट तैयार कर रहे हैं। इससे प्रदर्शनी में कला की प्रस्तुति को जीवंत रूप मिल रहा है।

अलग-अलग कालखंडों की पांडुलिपियों को डिजिटल फ्रेम में प्रदर्शित किया गया है। इसके माध्यम से युवा पीढ़ी पुरानी ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक सामग्री को आधुनिक तकनीक के जरिए देख और समझ पा रही है। प्रदर्शनी में मथुरा के महावन स्थित रसखान की समाधि, गोवर्धन के कुसुंबा सरोवर और मिर्जापुर के सारनाथ मंदिर की प्रतिकृतियां भी तैयार की गई हैं।

संस्कृति विभाग के प्राविधिक सहायक (संस्कृत) हरिश्चंद्र दुबे ने बताया कि प्राचीन संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं को देखकर युवाओं में काफी उत्साह है। मूर्तियों, चित्रों और डिजिटल पांडुलिपियों को देखकर वे उनके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व से जुड़े सवाल पूछ रहे हैं। विभाग की ओर से उन्हें जानकारी दी जा रही है, ताकि नई पीढ़ी प्रदेश और देश की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझ सके।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights