मथुरा, 01 अक्टूबर । श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के अध्यक्ष और हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह एडवोकेट ने आज गुरुवार को कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा से मुलाकात की। उन्होंने फूलमाला पहनाकर पंडित मिश्रा का स्वागत किया और भगवान राधा-कृष्ण की छवि तथा श्रीमद्भगवद्गीता भेंट की। करीब 30 मिनट चली इस मुलाकात में श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर के इतिहास, मूल गर्भगृह स्थल और न्यायालय में विचाराधीन मुकदमों पर विस्तार से चर्चा हुई।
महेंद्र प्रताप सिंह ने पंडित प्रदीप मिश्रा को हिंदू पक्ष के दावों से अवगत कराया। उन्होंने श्री मिश्र को बताया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को अलग-अलग कालखंडों में चार बार क्षतिग्रस्त किया गया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान मंदिर को तोड़ा गया और मूल गर्भगृह स्थल पर ईदगाह का निर्माण कराया गया। इस दौरान भगवान के विग्रहों को आगरा ले गया और जामा मस्जिद की सीढ़ियों में लगवा दिए थे।
उन्होंने बताया कि मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण और आगरा से भगवान के विग्रहों को वापस लाने की मांग को लेकर उच्च न्यायालय में दो वाद दायर किए गए हैं। इन मुकदमों की तैयारी के लिए देश-विदेश की पुस्तकालयाें से ऐतिहासिक दस्तावेज, पुस्तकें और अन्य प्रमाण जुटाकर साक्ष्य तैयार किए गए हैं। महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि मंदिर निर्माण का संघर्ष न्यायालयीन प्रक्रिया के साथ-साथ जनसमर्थन के माध्यम से भी जारी रहेगा।
मुलाकात के दौरान पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि यदि भगवान श्रीकृष्ण के मूल गर्भगृह स्थल पर भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण अब नहीं हुआ, तो यह कार्य फिर कब होगा। उन्होंने कहा कि श्री शिव बाबा के आशीर्वाद से मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होगा और सनातन धर्म और अधिक मजबूत बनेगा। कथावाचक मिश्रा ने महेंद्र प्रताप सिंह को आंदोलन में हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन दिया। और कहा कि श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति न्यास के बैनर तले भविष्य में कोई बड़ा आयोजन जन समर्थन जुटाने के लिए किया जाएगा और उनके पास समय होगा तो वह अवश्य उसमें शामिल होने के लिए आएंगे। उन्होंने कहा कि आज हम सबको सनातन की रक्षा करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है। इसका संदेश कथाओं के माध्यम से दिया जा रहा है। अब श्री कृष्ण जन्मभूमि की मुक्ति के विषय को भी अपने भक्तों के सामने रखेंगे। ताकि अधिक से अधिक लोगों तक यह विषय पहुंच सके। इस अवसर पर मुंबई से आए फिल्म निर्देशक विजय पाल सिंह, मनोज राजावत, मनोज चौधरी और भगत सिंह मौजूद रहे।
