औरैया, 23 जुलाई । उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद में मत्स्य विभाग की अनदेखी के चलते प्रजनन काल में भी यमुना नदी में खुलेआम मछलियों का शिकार किया जा रहा है। एक ओर जहां एक जून से 31 अगस्त तक मछलियों के प्रजनन काल के दौरान उनके शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है, वहीं दूसरी ओर शिकारी बेखौफ होकर जाल बिछाकर मछलियां पकड़ रहे हैं। इससे मछलियों की प्रजातियों के संरक्षण पर खतरा मंडराने लगा है।
अयाना थाना क्षेत्र के बीझलपुर के पास यमुना नदी में जालौन जनपद के कुठौंद क्षेत्र तक बड़े पैमाने पर जाल डालकर मछलियों का शिकार किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिबंध के बावजूद कार्रवाई न होने से अवैध शिकार लगातार जारी है।
जिला मत्स्य कार्यकारी अधिकारी रमाकांत निरंजन ने बताया कि यमुना नदी में आगरा सहित ऊपरी क्षेत्रों से केमिकल युक्त दूषित पानी छोड़े जाने की आशंका है। इसके कारण औरैया, कानपुर देहात से लेकर बांदा तक बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं, जबकि कई मछलियां अधमरी अवस्था में नदी के किनारे पहुंच रही हैं। उन्होंने बताया कि कालपी के पास से यमुना नदी के पानी का नमूना जांच के लिए भेजा गया है, जिससे मछलियों की मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सके।
उन्होंने यह भी बताया कि नदी की सफाई के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है। विभाग में स्टाफ और वाहन की कमी के कारण अवैध शिकार पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इसके अलावा उनके पास कानपुर देहात जिले का अतिरिक्त प्रभार होने से निगरानी और कार्रवाई प्रभावित हो रही है।
खाने में बरतें सावधानी
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मछलियां प्रदूषित या रसायनयुक्त पानी के कारण मरी हैं, तो उनके शरीर में विषैले तत्व मौजूद हो सकते हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर आने जैसी समस्याएं या गंभीर विषाक्तता हो सकती है। इसलिए ग्रामीणों और आम लोगों को मृत अथवा अधमरी मछलियों के सेवन से बचने की सलाह दी गई है।
