नीरज प्रजापति
बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल के बंद कमरे में फंदे पर लटकी मिली MBBS छात्रा, चौथे वर्ष की 23 वर्षीय छात्रा शगुन सैनी की मौत से मचा हड़कंप।
पुलिस-फोरेंसिक टीम जांच में जुटी, मेडिकल कॉलेज की व्यवस्थाओं पर फिर उठे गंभीर सवाल।
मुजफ्फरनगर। डॉक्टर बनने का सपना लेकर मेडिकल की पढ़ाई कर रही 23 वर्षीय छात्रा शगुन सैनी की मौत ने बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज को झकझोर दिया। मंसूरपुर क्षेत्र स्थित मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में MBBS के चौथे वर्ष की छात्रा का शव बंद कमरे में फंदे पर लटका मिलने से परिसर में हड़कंप मच गया। हरियाणा के कैथल की रहने वाली शगुन की मौत की खबर सामने आते ही उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटी को परिवार ने डॉक्टर बनते देखने के सपने संजोए थे, उसकी मौत की खबर ने हर किसी को स्तब्ध कर दिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि मेडिकल की पढ़ाई कर रही छात्रा की जिंदगी अचानक थम गई? यह सवाल अब पुलिस की जांच के केंद्र में है।
बंद कमरे में मिला शव, दरवाजा तोड़कर भीतर पहुंची पुलिस
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची। हॉस्टल का कमरा बंद होने के कारण दरवाजा तोड़कर भीतर प्रवेश किया गया, जहां शगुन का शव फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने शव को नीचे उतरवाकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की और पंचायतनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिटी अमृत जैन भी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाने की कार्रवाई शुरू की है।
मौत की वजह अब भी रहस्य, हर पहलू की पड़ताल
23 वर्षीय शगुन सैनी की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका अभी खुलासा नहीं हो सका है। पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि घटना से पहले क्या परिस्थितियां बनी थीं और छात्रा की मौत के पीछे आखिर क्या वजह रही। फिलहाल किसी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस जांच, घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
मेडिकल कॉलेज की व्यवस्था पर उठे सवाल।
विद्यार्थियों की सुरक्षा और सहयोग कितना मजबूत?
इस घटना ने मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा, हॉस्टल की निगरानी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता जैसी व्यवस्थाओं पर गंभीर चर्चा छेड़ दी है। मेडिकल की पढ़ाई कठिन और चुनौतीपूर्ण होती है। ऐसे में संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा देने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विद्यार्थियों को तनाव की स्थिति में समय पर सहायता, काउंसलिंग और भरोसेमंद संवाद का अवसर देना भी जरूरी है। बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज में पहले भी आत्महत्या से जुड़े प्रकरण सामने आने की चर्चा के बीच अब शगुन की मौत ने व्यवस्थाओं की समीक्षा की जरूरत को और महत्वपूर्ण बना दिया है। मौजूदा घटना यह सवाल जरूर खड़ा करती है कि विद्यार्थियों की परेशानियों को पहचानने और उन्हें मदद उपलब्ध कराने के लिए संस्थान में क्या प्रभावी व्यवस्था है।
