नीरज प्रजापति
कलंदरशाह के दो निजी अस्पताल जांच के घेरे में, एक अस्पताल में चिकित्सक की कुर्सी पर बैठा मिला दसवीं फेल युवक।
शामली। अस्पताल का नाम, मरीजों की भीड़ और उपचार की उम्मीद लेकिन यदि मरीजों की जांच और दवा देने की जिम्मेदारी ऐसे लोगों के हाथों में हो, जिनके पास चिकित्सा संबंधी डिग्री ही नहीं है, तो सवाल उठना लाजिमी है। शामली में स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के दौरान कुछ ऐसे ही चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। शहर के मोहल्ला कलंदरशाह में दो निजी अस्पतालों की जांच के दौरान उपचार व्यवस्था और चिकित्सकीय योग्यता से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हो गए। विभाग ने दोनों अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है।
स्वास्थ्य विभाग के सहायक नोडल अधिकारी डॉ. दीपक चौधरी ने सीएमओ तृतीय कुमार सक्सेना के निर्देश पर टीम के साथ दोनों अस्पतालों का निरीक्षण किया। पहले विहान हॉस्पिटल में पहुंची टीम को चिकित्सक की जगह एक ऐसा युवक मरीजों की जांच और उपचार करता मिला, जिसके बारे में दसवीं कक्षा में असफल होने की जानकारी सामने आई। आरोप है कि युवक के पास चिकित्सा संबंधी कोई डिग्री नहीं थी और वह चिकित्सक की कुर्सी पर बैठकर मरीजों को दवाएं दे रहा था। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में कुछ अन्य युवक भी मरीजों को इंजेक्शन लगाते हुए मिले। उनकी चिकित्सकीय योग्यता को लेकर भी सवाल उठे। अधिकारियों के पहुंचने पर चिकित्सक की कुर्सी पर बैठा युवक मौके से भाग निकला। इस घटनाक्रम ने अस्पताल में मरीजों के उपचार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। जांच के दौरान अस्पताल की दूसरी मंजिल पर कई बच्चे भर्ती मिले। उनके तीमारदारों ने अधिकारियों को बताया कि बच्चे कई दिनों से वहां भर्ती हैं। अस्पताल में बच्चों के उपचार और देखभाल की व्यवस्था को लेकर भी जांच की गई। ऐसे में सवाल उठता है कि बच्चों जैसे संवेदनशील मरीजों के इलाज में निर्धारित चिकित्सकीय मानकों का पालन हो रहा था या नहीं। इसके बाद टीम ने कलंदरशाह स्थित अरशद अंसारी हेल्थ केयर हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। यहां मरीजों का उपचार कर रहे व्यक्ति से अस्पताल का पंजीकरण और चिकित्सकीय डिग्री से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, लेकिन मौके पर कागजात प्रस्तुत नहीं किए जा सके। संचालक ने दस्तावेज दिखाने के लिए समय मांगा। अस्पताल में बच्चों की देखभाल के लिए मशीनें भी रखी मिलीं, लेकिन वे चालू हालत में नहीं थीं। साफ-सफाई की स्थिति पर भी सवाल उठे। मरीजों को दवाएं देने वाले युवकों की योग्यता से संबंधित दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं मिले। सहायक नोडल अधिकारी डॉ. दीपक चौधरी ने बताया कि दोनों अस्पताल संचालकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया भी अपनाई जा सकती है।
