गैरसैंण(भराड़ीसैंण), 28 अक्टूबर । उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दूसरे और अंतिम दिन बुधवार को कार्यस्थगन प्रस्तावों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी कांग्रेस ने सदन में जमकर हंगामा किया। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नियम 310 के तहत दिए गए नोटिस को स्वीकार नहीं किए जाने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने वेल में पहुंचकर नारेबाजी की। इस दौरान ‘बंटी-बबली की सरकार नहीं चलेगी’ और ‘चंदा चोरों को संरक्षण देने वाली सरकार नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए गए। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी। इसके बीच प्रश्नकाल और विधायी कार्यवाही संचालित की गई।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर नियम 310 के तहत नोटिस दिया। कांग्रेस के अन्य विधायकों प्रीतम सिंह, अनुपमा रावत और इंजीनियर रवि कुमार सहित अन्य सदस्यों ने महंगाई, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर नियम 58 के तहत नोटिस दिए। विधानसभा अध्यक्ष ने नियम 58 के तहत दिए गए नोटिसों को स्वीकार करते हुए उन्हें प्रश्नकाल के बाद सुनने की व्यवस्था दी, जबकि नियम 310 के तहत भ्रष्टाचार पर दिए गए नोटिस को स्वीकार नहीं किया। इससे नाराज कांग्रेस विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया।
हंगामे के बीच अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराया। विधायक बृजभूषण गैरोला के प्रश्न का उत्तर परिवहन मंत्री भारत चौधरी ने दिया। इस दौरान विपक्षी विधायकों की नारेबाजी जारी रही। सुबह 11:05 बजे सदन की कार्यवाही 11:20 बजे तक स्थगित कर दी गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर कांग्रेस विधायक वेल में पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इसके बावजूद प्रश्नकाल जारी रहा। विधायक प्रीतम पंवार के प्रश्न का उत्तर खाद्य मंत्री रेखा आर्य ने दिया।
इस दौरान विपक्षी विधायक काले रुमाल लहराते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। उन्होंने केदारनाथ सोना प्रकरण की जांच कराने की मांग भी उठाई। मंत्री रेखा आर्य को निशाना बनाते हुए कांग्रेस विधायकों ने ‘210 करोड़ का झुमका कहां गिरा’ के नारे लगाए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोबारा स्थगित करनी पड़ी। तीसरी बार कार्यवाही शुरू होने पर भी विरोध जारी रहा, जिसके बाद सदन को 12:15 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
कांग्रेस विधायकों का कहना था कि विधानसभा में परंपरा रही है कि नियम 310 के तहत प्राप्त नोटिस को नियम 58 के तहत सुनकर चर्चा कराई जाती रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इस बार इस परंपरा का पालन नहीं किया जा रहा है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदन में कई परंपराएं हैं। उन्होंने सामूहिक फोटोग्राफी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें पक्ष और विपक्ष के विधायकों के शामिल होने की परंपरा रही है, लेकिन विपक्ष ने उसका बहिष्कार कर स्वयं इस परंपरा को तोड़ा है।
इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई। कांग्रेस विधायक वेल में खड़े होकर नारेबाजी करते रहे। हंगामे के बीच सदन की निर्धारित विधायी कार्यवाही पूरी कराई गई। कार्यस्थगन प्रस्तावों पर विपक्ष की ओर से उठाए गए मुद्दों पर चर्चा नहीं हो सकी।
विधानसभा परिसर में बुधवार को सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले सामूहिक फोटोग्राफी को लेकर भी राजनीतिक खींचतान देखने को मिली। विधानसभा अध्यक्ष की ओर से मुख्य द्वार के बाहर आयोजित फोटो सेशन में सत्ता पक्ष के विधायक और दोनों निर्दलीय विधायक शामिल हुए, जबकि कांग्रेस विधायकों ने इसका बहिष्कार किया।
फोटो सेशन के दौरान कांग्रेस विधायक विधानसभा भवन की सीढ़ियों पर बैठकर प्रदर्शन करते रहे। उनकी प्रमुख मांगों में अंकिता भंडारी प्रकरण में न्याय, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सदन में चर्चा और बेरोजगारी और महंगाई पर सरकार से जवाब मांगना शामिल था।
