simplified-registration-rules-small-sellers-online

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर । देश में ऑनलाइन बाजारों (ई-कॉमर्स) के छोटे विक्रेताओं के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण के सरलीकृत नियम एक नवंबर से लागू हो रहे हैं। इस नई व्यवस्था से देश के लगभग 9.5 लाख छोटे ऑनलाइन कारोबारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने एक दिन पहले ही केंद्रीय जीएसटी नियमों में बदलाव की अधिसूचना जारी की है। इसके तहत हर महीने 2.5 लाख रुपये से अधिक का इनपुट टैक्स क्रेडिट आगे नहीं देने वाले छोटे विक्रेता किसी अन्य राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में पंजीकरण करा सकेंगे, भले ही वहां उनकी कोई भौतिक उपस्थिति न हो। इसके लिए वे उस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में ई-कॉमर्स मंच के गोदाम को कारोबार का मुख्य स्थान घोषित कर सकते हैं।

अधिसूचना के मुताबिक विक्रेता के लिए गृह राज्य में भौतिक उपस्थिति होना जरूरी होगा। वहां उसके परिसर का भौतिक सत्यापन और आधार प्रमाणीकरण किया जाएगा। अन्य राज्यों में पंजीकरण ई-कॉमर्स मंच की सहमति से कराया जा सकेगा और इसके लिए कर अधिकारी की कोई भूमिका नहीं होगी। केंद्रीय जीएसटी नियमों में इन बदलावों को आठ अक्टूबर को हुई जीएसटी परिषद की बैठक में मंजूरी दी गई थी। सीबीआईसी की अधिसूचना में कहा गया है कि यदि ई-कॉमर्स मंच पंजीकृत व्यक्ति को दी गई सहमति वापस लेता है, तो उसे साझा पोर्टल पर इसकी सूचना देनी होगी।

इस कदम से करीब 9.5 लाख छोटे विक्रेताओं को उन सभी राज्यों में भौतिक कार्यालय स्थापित किए बिना देशभर के बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है, जहां उनका सामान रखा जाता है। इससे ई-कॉमर्स के विभिन्न कारोबारी मॉडल के बीच कर संबंधी समानता भी बढ़ेगी। ऐसे छोटे विक्रेताओं को फॉर्म जीएसटी आरईजी-01 में आवेदन करना होगा और उस गृह राज्य में अपने स्थायी खाता संख्या (पैन) पर प्राप्त माल एवं सेवा कर पहचान संख्या (जीएसटीआईएन) का उल्लेख करना होगा, जहां उनकी भौतिक उपस्थिति है।

आवेदन संबंधित ई-कॉमर्स मंच को उसकी सहमति के लिए भेजा जाएगा। मंच को सात कार्यदिवस के भीतर अपनी सहमति देनी होगी। निर्धारित अवधि में सहमति नहीं मिलने पर आवेदन पर आगे कार्रवाई नहीं की जाएगी।

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights