नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। आज होली चाइल्ड पब्लिक इंटर कॉलेज, जड़ौदा, मुजफ्फरनगर में विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक के प्रति जागरूक करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के सही, सुरक्षित और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग की जानकारी देने के उद्देश्य से ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता जागरूकता एवं डिजिटल जिम्मेदारी कार्यशाला’ का आयोजन किया गया।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में शुभी वर्मा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता विशेषज्ञ एवं प्रोफेसर, एमआईईटी कॉलेज,मेरठ तथा शिखा चौहान ने विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की उपयोगिता, कार्यप्रणाली और दैनिक जीवन में इसके बढ़ते प्रभाव के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
शुभी वर्मा ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आज शिक्षा, स्वास्थ्य, संचार, अनुसंधान और विभिन्न व्यावसायिक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। एआई प्रणालियाँ आँकड़ों एवं अनुभवों से सीखने, चित्रों और आवाजों को पहचानने, भाषा को समझने तथा नई सामग्री तैयार करने, समस्याओं को हल करने और संभावित परिणामों का अनुमान लगाने में सक्षम हैं। इस संदर्भ में विद्यार्थियों को स्पेम ईमेल की पहचान करने वाली प्रणाली का उदाहरण देकर समझाया गया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस प्रकार पुराने संदेशों के स्वरूप और विशेषताओं का विश्लेषण करके अनचाहे संदेशों की पहचान करने में सहायता करती है।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का उपयोग पढ़ाई को अधिक प्रभावी बनाने, नई जानकारियाँ प्राप्त करने, रचनात्मकता विकसित करने और समस्याओं के समाधान खोजने के लिए करने हेतु प्रेरित किया गया। साथ ही, उन्हें समझाया गया कि एआई द्वारा दी गई प्रत्येक जानकारी को बिना जाँच किए स्वीकार नहीं करना चाहिए, बल्कि उसकी सत्यता की पुष्टि करना आवश्यक है।
डिजिटल जिम्मेदारी पर विशेष जोर देते हुए विद्यार्थियों को इंटरनेट पर सुरक्षित रहने, व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता बनाए रखने, साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करने, भ्रामक सूचनाओं की पहचान करने तथा तकनीक का नैतिक और जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग करने के प्रति जागरूक किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक उपयोगी सहायक है, लेकिन मानवीय विवेक, मौलिक चिंतन और सही निर्णय लेने की क्षमता का महत्व सदैव बना रहेगा।
विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रवेंद्र दहिया ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में विद्यार्थियों को केवल पारंपरिक शिक्षा तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें नई तकनीकों के प्रति जागरूक, कुशल और जिम्मेदार बनाना भी आवश्यक है। इस प्रकार की कार्यशालाएँ विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ तकनीक का सकारात्मक उपयोग करने की प्रेरणा देती हैं।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग केवल जानकारी प्राप्त करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसके माध्यम से अपने ज्ञान में वृद्धि, रचनात्मक क्षमताओं का विकास और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रति जागरूक बनाना तथा उन्हें सुरक्षित, विवेकपूर्ण और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक के रूप में विकसित करना रहा।
