नीरज प्रजापति
79वें निरंकारी संत समागम के समापन पर सामूहिक विवाह समारोह ने पेश की सामाजिक एकता की मिसाल, भारत के विभिन्न राज्यों के साथ ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से भी पहुंचे नवयुगल; सतगुरु माता सुदीक्षा जी ने दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और समान जिम्मेदारी निभाने का दिया संदेश।
समालखा। विवाह को भव्यता, दिखावे और अनावश्यक खर्चों से जोड़कर देखने वाले समाज के सामने हरियाणा के समालखा में आयोजित निरंकारी सामूहिक विवाह समारोह ने सादगी और मानवीय एकता की ऐसी तस्वीर पेश की, जिसने सामाजिक सरोकारों की एक नई मिसाल कायम की। 79वें निरंकारी संत समागम के समापन के बाद आयोजित इस समारोह में 126 जोड़ों ने एक साथ विवाह के पवित्र बंधन में बंधकर अपने नए जीवन की शुरुआत की। इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और देशों से आए परिवार एक ही मंच पर एक-दूसरे की खुशियों के सहभागी बने। संत निरंकारी मिशन की ओर से समाज कल्याण विभाग के सहयोग से आयोजित इस समारोह में सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह में विवाह की पारंपरिक रस्मों को सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराया गया। जयमाला के साथ निरंकारी परंपरा के सांझा-हार की रस्म निभाई गई। मिशन की प्रधान राजकुमारी जी और कार्यकारिणी सदस्यों ने नवदंपतियों को सांझा-हार पहनाकर उनके सुखद वैवाहिक जीवन की मंगलकामना की। इसके बाद हिंदी में भक्तिमय निरंकारी लावों का गायन हुआ। इन लावों के माध्यम से पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, सम्मान और समर्पण के महत्व को समझाया गया। कार्यक्रम के दौरान सतगुरु माता सुदीक्षा जी और निरंकारी राजपिता रमित जी ने नवविवाहित जोड़ों पर पुष्पवृष्टि कर उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने संदेश में कहा कि विवाह केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवनभर निभाई जाने वाली जिम्मेदारी और आपसी विश्वास का रिश्ता है। पति-पत्नी को एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को समझते हुए समान सहयोग करना चाहिए। दोनों एक-दूसरे के दो पंख बनकर जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करें और एक-दूसरे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने रिश्तों में क्षमा, विनम्रता और आपसी सम्मान बनाए रखने की प्रेरणा भी दी। संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा के अनुसार, समारोह में बिहार, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न क्षेत्रों के जोड़ों ने भाग लिया। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा से आए नवयुगल भी इस आयोजन का हिस्सा बने।
इस प्रकार 126 जोड़ों का एक साथ विवाह केवल पारिवारिक खुशियों का अवसर नहीं रहा, बल्कि सादगी, समानता, आपसी सम्मान और वैश्विक भाईचारे का संदेश देने वाला आयोजन बन गया। समालखा की धरती से शुरू हुई इन 126 नई जीवन यात्राओं ने यह संदेश दिया कि रिश्तों की मजबूती महंगे इंतजामों से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और एक-दूसरे के प्रति समर्पण से आती है।
