नीरज प्रजापति 

” खता तो बताओ” साढ़े दस मिनट का ये गाना बेमिसाल है। यह गाना मेरे लिए सिर्फ एक गाना नहीं, अभिनय की एक परीक्षा था।
गाने डांस नहीं, कोई स्टेप नहीं सिर्फ आंखों और चेहरे से कहानी कहने की चुनौती
मैंने अब तक कई गानों में काम किया है, लेकिन यह गाना मेरे लिए बिल्कुल अलग था। बाकी गानों में डांस स्टेप होते हैं, चेहरे पर अलग-अलग भाव दिखाने होते हैं—कहीं मुस्कुराना है, कहीं खुशी दिखानी है, आंखों को घुमाना है, शरीर को लय में चलाना है, कई ड्रेस बदली जाती है, ब्यूटी शॉट होते है और बहुत कुछ करना होता है। लेकिन यह गाना उन सबसे बिल्कुल अलग था।
इस गाने में मुझे अपने चेहरे को लगभग भावशून्य रखना था, लेकिन आंखों में सवाल थे। मुझे आंखों से बहुत कुछ कहना था, जबकि चेहरे पर कोई बनावटी भाव नहीं लाना था। मेरे लिए यही इस गाने की सबसे बड़ी चुनौती थी। किसी तरह का डांस स्टेप नहीं, किसी तरह के दूसरे कपड़े नहीं बदलने कोई बेटी शॉट नहीं होना था।
10 मिनट 30 सेकंड का लगातार अभिनय
सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि यह करीब 10 मिनट 30 सेकंड लंबा गाना था। इसमें मेरे लगभग दस अंतरे थे और सामने वाले किरदार विकास बालियान के भी लगभग दस अंतरे थे। हमें यह तक याद रखना था कि सामने वाला कलाकार अपना हिस्सा कहां खत्म करता है, संगीत कहां से शुरू होता है और कहां खत्म होता है और उसके बाद मुझे किस जगह अपनी प्रतिक्रिया और अभिनय देना है।
यह केवल लिप्सिंग नहीं थी। हर शब्द के साथ चेहरे, आंखों और शरीर का तालमेल बनाना था। सामने बहुत मजे हुए कलाकार विकास बालियान थे जो कबीर की भूमिका निभा रहे थे और मुझे उनसे यह पता करना था कि वह जो शराब पीते हैं शायरी में लगे रहते हैं आखिर किसकी याद में लगे रहते हैं शायद यह भी प्रतीत होता था कि वह मेरे इश्क में डूबे हुए हैं और खुद को बर्बाद कर रहे हैं मुझे यह सब पता करना था।।
सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इस गाने की तैयारी के लिए हमारे पास समय ही नहीं था। जिस दिन गाने की शूटिंग होनी थी, उससे सिर्फ दो दिन पहले हमें गाना मिला। उसमें भी बैठकर लगातार अभ्यास करने का कोई अवसर नहीं था, क्योंकि फिल्म के बाकी दृश्यों की शूटिंग भी साथ-साथ चल रही थी।
और शूटिंग भी आसपास नहीं जम्मू कश्मीर में चल रही थी और कश्मीर के भी उन अनंतनाग, पहलगाम में जहां आतंकवादी गतिविधियों का लगातार खतरा बना हुआ था और बीच-बीच में पुलिस कहीं भी हम सभी को अपनी हिरासत में ले लिया करती थी। तीन-तीन चार-चार घंटे पूरा ग्रुप पुलिस हिरासत में रहता था फिर मिलिट्री की देखरेख में जहां हम रुके होते ठहरे होते थे वहां मिलिट्री हमें छोड़ कर आती थी। एक टेंशन बहुत बड़ी थी आतंकवादी घटना घटने की।
फिर वह दिन आया जब हमें हाउसबोट पर यह गाना शूट करना था।
एक बार संगीत शुरू हुआ तो सीधे अंत तक हमने इस गाने को हाउसबोट पर लगभग छह अलग-अलग जगहों और पोजीशन पर शूट किया। कमाल की बात यह थी कि एक बार संगीत शुरू हुआ तो गाना खत्म होने तक हमें लगातार अभिनय करते रहना था। बीच में रुकने की गुंजाइश नहीं थी।
लगातार 10 मिनट 30 सेकंड तक लिप्सिंग करते हुए अभिनय करना अपने आप में बहुत बड़ी चुनौती थी।
कई बार मुझे नीचे बैठना था, फिर उठना था। कई बार गिरने जैसी स्थिति आती थी। कभी शॉल शरीर के नीचे आ जाती थी, कभी शरीर को दूसरी तरफ मोड़ना पड़ता था। एक पल भी ऐसा नहीं था जब हम बिल्कुल स्थिर खड़े रह सकें।
कुछ हिस्से बैठे हुए भी थे, लेकिन वहां भी शरीर को आगे-पीछे और अलग-अलग भावों के साथ चलाना पड़ता था। हर चीज कैमरे के हिसाब से करनी थी और सबसे बड़ी बात यह थी कि सब कुछ लगातार चल रहा था।
छोटे-छोटे तालमेल भी बहुत मायने रखते हैं
और सिर्फ मेरा अभिनय ही नहीं था। मेरे साथ मौजूद कलाकार विकास बालियान के साथ भी कई छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखना था।
कभी उनके हाथ से सिगरेट लेनी थी, कभी नहीं लेनी थी। कभी उनके हाथ में शराब का गिलास लेना था, कभी सिर्फ अभिनय करना था कि मैं लेने वाली हूं। यह भी ध्यान रखना था कि गिलास वास्तव में हाथ से न छिने, सिगरेट कितनी लेनी है और फिर किस तरह वापस करनी है।
ये चीजें देखने में बहुत छोटी लगती हैं, लेकिन कैमरे के सामने इन्हीं छोटी-छोटी बातों से पूरा दृश्य स्वाभाविक दिखाई देता है।
पूरे गाने में शराब और सिगरेट का माहौल भी कहानी का हिस्सा था। शराब के लिए वहां प्रॉप का इस्तेमाल किया गया था और सिगरेट भी आयुर्वेदिक थी। बीच में इन चीजों को बदलने की कोई गुंजाइश नहीं थी। हर चीज को उसी निरंतरता के साथ निभाना था।
चेहरे पर शून्यता, लेकिन आंखों में सवाल
लेकिन मेरे लिए सबसे बड़ी चुनौती थी—चेहरे पर सिर्फ एक भाव रखना।
मुझे चेहरे पर न तो खुशी दिखानी थी, न मुस्कुराहट और न ही किसी तरह का बनावटी भाव। मेरे चेहरे पर एक तरह की शून्यता थी, लेकिन मेरी आंखों में सवाल थे।
मुझे लगा कि यही वह जगह है जहां मैंने अभिनय को थोड़ा और गहराई से समझा।
अभिनय सिर्फ डांस करने या चेहरे पर अलग-अलग भाव दिखाने का नाम नहीं है। कई बार कुछ न करके भी बहुत कुछ कहना पड़ता है। कभी-कभी आंखें वह कह देती हैं, जो शब्द और चेहरे के भाव नहीं कह पाते।
और सबसे बड़ी खुशी—एक भी रीटेक नहीं!
भगवान की कृपा से सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि मुझे पूरे गाने में एक भी रीटेक नहीं देना पड़ा।
छह अलग-अलग पोजीशन और लोकेशन पर हमने लगातार वन-टेक में शॉट किए। एक बार कैमरा और संगीत शुरू हुआ और हम गाने के अंत तक अपने किरदार में बने रहे।
जब गाना खत्म हुआ तो वहां मौजूद करीब 15-20 लोगों ने जिस तरह तालियां बजाईं और मेरी तारीफ की, वह पल मैं कभी नहीं भूल सकती।
उस समय मुझे सच में लगा कि—
“हां, मैं भी कुछ कर सकती हूं।”
उस एक पल ने मेरे अंदर जो आत्मविश्वास पैदा किया, वह मेरे लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी। क्योंकि मूल रूप से मैं बिंदास हूं बोल्ड हूं 24 घंटे हंसती रहती हूं। मजाक करती रहती हो और यहां तो मुझे बिल्कुल अपनी ओरिजिनल जीवन शैली से बिल्कुल अलग गंभीर भूमिका निभानी थी।
विकास बालियान के साथ काम करना मेरे लिए सीखने का अनुभव रहा
मैं इस पूरे अनुभव के लिए विकास बालियान जी की भी बहुत आभारी हूं। वह फिल्म निर्माता हैं, निर्देशक हैं, लेखक हैं और खुद एक कलाकार भी हैं। सबसे खास बात यह है कि वह बहुत वरिष्ठ और अनुभवी होने के बावजूद अपने जूनियर कलाकारों को कभी यह महसूस नहीं होने देते कि वह उनसे छोटे हैं या कम अनुभव रखते हैं।
वह हर कलाकार के साथ बहुत सहज होकर काम करते हैं और हर किसी को कुछ न कुछ सीखने का अवसर देते हैं।
उनका कलाकारों को सहज और आरामदायक माहौल देने का तरीका मुझे बहुत अलग लगा।
उनकी एक बहुत अच्छी आदत है—जब तक कलाकार पूरी तरह तैयार नहीं होता, उसका मन और मूड अभिनय के लिए तैयार नहीं होता, तब तक वह शूट शुरू करने की जल्दी नहीं करते।
वह पहले कलाकार को वैसा ही माहौल देते हैं, जिसमें वह अपने किरदार में पूरी तरह उतर सके। जब उन्हें लगता है कि कलाकार मानसिक रूप से तैयार है, तभी वह कैमरा चलवाते हैं।
मेरे लिए यह बहुत बड़ी सीख है।
एक कलाकार के लिए सिर्फ कैमरा, रोशनी और संवाद ही महत्वपूर्ण नहीं होते। उससे पहले यह भी जरूरी है कि कलाकार अपने आसपास के माहौल में सुरक्षित, सहज और आत्मविश्वास से भरा महसूस करे। विकास बालियान जी इस बात को बहुत अच्छी तरह समझते हैं।
मुझे लगता है कि यही वजह है कि उनके साथ काम करते हुए कलाकार अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता है।
वह खुद कलाकार हैं, इसलिए शायद वह कलाकार की उस बेचैनी और दबाव को भी समझते हैं, जो कैमरे के सामने खड़े होने से पहले मन में होता है।
मैं खुद को बहुत खुशनसीब मानती हूं कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिला। इतने कम समय में मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है और मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में उनके साथ काम करके मैं अभिनय को और बेहतर तरीके से समझ पाऊंगी। साथ ही में मुजफ्फरनगर का भी धन्यवाद देना चाहूंगी कि यहां मुझे मेरी पहली तीन फिल्मों में काम करने का मौका मिला और यहां के कई सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थलों का दर्शन करने का मौका मिला। यहां के लोग बहुत अच्छे हैं जैसे यहां के अच्छा की मिठास की चर्चा होती है वैसे ही यहां के लोग बोलचाल से थोड़े कठोर दिखाई दे सकते हैं मगर दिल के बहुत अच्छे हैं।

इस गाने ने मेरा आत्मविश्वास बदल दिया
मैं वर्षा ठाकुर, बुलंदशहर की रहने वाली हूं और फिलहाल नोएडा में रहती हूं। मैं कई गानों में काम कर चुकी हूं और तीन फिल्मों में भी अभिनय कर चुकी हूं, जो आने वाली हैं। इसके अलावा मैंने सात और फिल्मों को साइन किया है, जिन्हें मुझे जुलाई 2027 तक पूरा करना है।
आने वाले समय में मेरे कई और गाने भी दर्शकों के सामने आएंगे और मैं अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस के साथ काम कर रही हूं। मेरा सपना है मैं एक दिन बॉलीवुड में अपना बड़ा नाम करूं।
लेकिन सच कहूं तो यह गाना मेरे लिए सिर्फ एक और गाना नहीं था।
इसने मुझे एक अलग किरदार में जाने का मौका दिया। इसने मुझे सिखाया कि अभिनय केवल डांस स्टेप या चेहरे पर अलग-अलग भाव दिखाने का नाम नहीं है।
कभी-कभी बिना मुस्कुराए, बिना शरीर को ज्यादा हिलाए और बिना कोई बड़ा हाव-भाव किए सिर्फ आंखों से भी पूरी कहानी कही जा सकती है।
मैंने इस गाने में यही सीखा।
जब आप मेरी आने वाली फिल्में देखेंगे तो शायद आपको मेरे काम के अलग-अलग रंग दिखाई देंगे, लेकिन इस गाने का अनुभव मेरे लिए हमेशा खास रहेगा। क्योंकि यहां मैंने सिर्फ एक गाना नहीं किया—मैंने खुद को एक नए किरदार में खोजा है।
और जब बिना किसी रीटेक के 10 मिनट 30 सेकंड का इतना कठिन गाना पूरा हुआ और वहां मौजूद लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं, तो मेरे अंदर जो विश्वास पैदा हुआ, वह शायद किसी पुरस्कार से कम नहीं था।
यह गाना मेरे लिए एक गाना नहीं, मेरी अभिनय-यात्रा का एक ऐसा पड़ाव है जिसने मुझे खुद पर भरोसा करना सिखाया।
यह खास गाना आप भी देखिए
जिस गाने के लिए मैंने इतना कुछ सीखा, इतना कुछ अनुभव किया और जिसे हमने बिना किसी रीटेक के पूरा किया, वह अब दर्शकों के लिए उपलब्ध है।
यह गाना आप सुखराग म्यूजिक के यूट्यूब चैनल पर देख सकते हैं।
उम्मीद है कि जब आप यह गाना देखेंगे तो आपको सिर्फ गाना नहीं दिखाई देगा, बल्कि उसके पीछे की मेहनत, अभिनय की चुनौती और उस एक कलाकार का आत्मविश्वास भी दिखाई देगा, जिसने बिना डांस स्टेप के सिर्फ अपनी आंखों और अभिनय से कहानी कहने की कोशिश की है।

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