आखिर गौरक्षक टीम ने निभाया मानवता का धर्म आम आदमी की मानवता हुई सर्मसार
आदर्श कॉलोनी के गेट नंबर-3 पर दुर्गंध से लोगों का जीना हुआ मुश्किल, कई शिकायतों के बाद भी नहीं जागा प्रशासन; कॉलोनीवासियों की सूचना पर रात में पहुंची गौरक्षक टीम ने कराया अंतिम संस्कार
क्रिश कर्णवाल
मुजफ्फरनगर। नगर की पॉश कॉलोनियों में शुमार आदर्श कॉलोनी में नगर पालिका की लापरवाही का एक बेहद शर्मनाक और संवेदनहीन मामला सामने आया है। कॉलोनी के गेट नंबर-3 के सामने पिछले दो दिनों से एक मृत बंदर बोरे में बंद पड़ा हुआ था। भीषण गर्मी और लगातार पड़े रहने के कारण उससे उठ रही तेज दुर्गंध ने आसपास रहने वाले लोगों का जीना दूभर कर दिया। स्थिति ऐसी हो गई कि लोगों का वहां से गुजरना तक मुश्किल हो गया और दुर्गंध घरों के अंदर तक फैलने लगी।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने नगर पालिका के सफाई विभाग को कई बार फोन कर मृत बंदर को हटाने की सूचना दी, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और सफाई कर्मी मौके पर नहीं पहुंचे। लोगों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद नगर पालिका ने मामले को पूरी तरह नजरअंदाज किया, जिससे लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है।
कॉलोनीवासियों का यह भी आरोप है कि संबंधित वार्ड सभासद को भी पूरे मामले की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने भी कोई रुचि नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं का समाधान कराना होता है, लेकिन इस मामले में जिम्मेदार पूरी तरह उदासीन बने रहे।
जब प्रशासन और नगर पालिका से निराशा हाथ लगी तो आदर्श कॉलोनी निवासी अभिनव गोयल, विशाल शर्मा और सुधांशु गर्ग मिंटू गिरी ने स्वयं पहल करते हुए गौरक्षक टीम को पूरे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही गौरक्षक टीम ने बिना देर किए रात्रि में मौके पर पहुंचकर मृत बंदर को वहां से हटाया।
गौरक्षक टीम ने मृत बंदर को सम्मानपूर्वक उठाकर विधि-विधान और रीति-रिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कराया। टीम की इस संवेदनशील और मानवीय पहल की कॉलोनीवासियों ने सराहना करते हुए कहा कि जिस कार्य को नगर पालिका और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को करना चाहिए था, उसे समाजसेवियों ने अपनी जिम्मेदारी समझकर पूरा किया।
घटना के बाद कॉलोनीवासियों में नगर पालिका की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा रोष देखने को मिला। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते मृत पशु को हटा दिया जाता तो न केवल दुर्गंध से राहत मिलती, बल्कि संक्रमण फैलने की आशंका भी टल जाती। नागरिकों ने मांग की कि नगर पालिका ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करे और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी कॉलोनी के लोगों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
आदर्श कॉलोनी की इस घटना ने एक बार फिर नगर पालिका की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं दूसरी ओर गौरक्षक टीम की तत्परता और सेवा भावना ने यह साबित कर दिया कि समाज के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी निभाने के लिए केवल सरकारी पद ही नहीं, बल्कि सेवा का जज़्बा भी जरूरी होता है।
