नीरज प्रजापति
शेरपुर के हमीदुल्ला ने मीडिया सेंटर में पत्रकारों से वार्ता कर सुनाई पूरी आपबीती, सरकारी चकरोड पर कब्जे का आरोप; मकान-दुकान में घुसने और ताले तोड़ने का भी दावा, एसएसपी से परिवार की सुरक्षा की गुहार।
मुजफ्फरनगर। कोतवाली नगर थाना क्षेत्र के गांव शेरपुर में सरकारी भूमि पर दर्ज चकरोड पर कथित कब्जे को लेकर चल रहा विवाद अब बेहद गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है। चकरोड से कथित कब्जा हटाने की मांग करने वाले गांव निवासी हमीदुल्ला ने मीडिया सेंटर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए कुछ लोगों पर उसके और उसके परिवार को जान से मारने, अपहरण कराने तथा बेटियों को बदनाम करने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का कहना है कि चकरोड से कब्जा हटाने की मांग करने के बाद से ही उस पर और उसके परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। हमीदुल्ला ने बताया कि उसने पूरे मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक समेत मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और अन्य अधिकारियों को प्रार्थना पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। उसने अधिकारियों से कथित कब्जे को हटवाने के साथ-साथ परिवार की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की भी गुहार लगाई है। मीडिया सेंटर में पत्रकारों से वार्ता करते हुए हमीदुल्ला पुत्र याहिया निवासी ग्राम शेरपुर ने बताया कि गांव समाज शेरपुर की भूमि के खसरा नंबर 924, 936, 835 और 842 राजस्व अभिलेखों में चकरोड के रूप में दर्ज हैं। उसका आरोप है कि उक्त सरकारी भूमि पर गांव के कुछ लोगों ने कथित रूप से कब्जा कर रखा है। हमीदुल्ला ने अपनी शिकायत में जाकिर, जाबिर, उस्मान, अनीस, हसन, फुरमान और इरफान समेत कई लोगों पर चकरोड पर कब्जा करने का आरोप लगाया है। साथ ही उसने लेखपाल भूपेंद्र सिंह और ग्राम प्रधान पर भी कब्जा कराने में मिलीभगत और आर्थिक लेनदेन के गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना बाकी है। पीड़ित ने बताया कि 26 अक्टूबर 2025 को उसके साथ कथित मारपीट, लूट तथा उसकी दुकान और मकान के बैनामे से संबंधित कागजात जबरन ले जाने के आरोपों को लेकर उसने अगले दिन अधिकारियों को शिकायत भेजी थी। शिकायत मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी, पुलिस अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने का दावा किया गया है। हमीदुल्ला के अनुसार, उस शिकायत पर पुलिस ने जांच की थी। इसके बाद गांव के लोगों के बीच आपसी समझौता हुआ था। पीड़ित का दावा है कि उस समय कथित कब्जेदारों ने अपनी गलती मानते हुए चकरोड खाली करने की बात कही थी। आरोप है कि समझौते के बावजूद चकरोड से कब्जा नहीं हटाया गया। हमीदुल्ला का कहना है कि उसने कई बार संबंधित लोगों, ग्राम प्रधान और लेखपाल से समझौते के अनुसार रास्ता खाली करने के लिए कहा, लेकिन कथित तौर पर उसकी बात नहीं मानी गई।
हमीदुल्ला का आरोप है कि चकरोड खाली कराने के लिए बार-बार कहने पर आरोपी पक्ष उससे नाराज हो गया। उसके अनुसार, उसे और उसके परिवार को गांव से निकालने, जमीन, मकान और दुकान पर कब्जा करने तथा उसके और बच्चों के खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज कराने की धमकियां दी जाने लगीं।पीड़ित ने आरोप लगाया कि उसकी बेटियों को भी बदनाम करने की धमकी दी गई। उसने बताया कि लगातार मिल रही धमकियों के कारण उसका पूरा परिवार भयभीत है। शिकायत में हमीदुल्ला ने 21 अगस्त 2026 को सुबह करीब 11 बजे की घटना का भी जिक्र किया है। उसका आरोप है कि ग्राम प्रधान सहित कई लोग एकराय होकर लाठी-डंडे, छीनी और हथौड़े लेकर उसके मकान पर पहुंचे। पीड़ित के मुताबिक, घर पहुंचने के बाद आरोपियों ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसे बाहर निकलने के लिए कहा। आरोप है कि इसी दौरान उसे चकरोड को लेकर शिकायत करने का परिणाम भुगतने और जान से मारने की धमकी दी गई। हमीदुल्ला का दावा है कि आरोपियों ने उसके मकान में जबरन घुसने और उसे तथा उसकी पत्नी को घर से बाहर खींचने का प्रयास किया। बच्चों को भी घर से बाहर निकालने की कोशिश किए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित ने आरोप लगाया कि विवाद के दौरान उसकी दुकान पर भी जबरन कब्जा करने का प्रयास किया गया। शिकायत के अनुसार, दुकान के ताले तोड़े गए और तोड़फोड़ की गई। आसपास के लोगों ने मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया, जिसके बाद आरोपी कथित तौर पर वहां से चले गए। हमीदुल्ला का कहना है कि यदि आसपास के लोग समय पर हस्तक्षेप नहीं करते तो उसके और परिवार के साथ गंभीर घटना हो सकती थी। पीड़ित ने शिकायत में सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जाते समय आरोपियों ने उसे, उसकी पत्नी और बच्चों को जान से मारने की धमकी दी। उसने आरोप लगाया कि उसकी बेटियों के अपहरण और उनके साथ दुष्कर्म कराने की धमकी तक दी गई। हमीदुल्ला के अनुसार, आरोपियों ने कथित तौर पर यह भी धमकी दी कि उसकी बेटियों की वीडियो बनाकर प्रसारित कर दी जाएगी और उनके विवाह में बाधा डाली जाएगी। इसके अलावा पुलिस या थाने में शिकायत करने पर उसके और परिवार के सदस्यों के अपहरण और हत्या की धमकी दिए जाने का आरोप लगाया गया है। हमीदुल्ला ने पत्रकारों से कहा कि वह इन कथित धमकियों के कारण अपने परिवार को लेकर बेहद चिंतित है। उसका कहना है कि परिवार में पत्नी और बच्चों को लेकर भय का माहौल है और उसे आशंका है कि आरोपी उसके परिवार को नुकसान पहुंचा सकते हैं। पीड़ित ने कहा कि उसे पुलिस और प्रशासन पर भरोसा है। उसके अनुसार, पहले भी उसकी शिकायत पर पुलिस ने कार्रवाई की थी, इसी विश्वास के कारण उसने दोबारा वरिष्ठ अधिकारियों का दरवाजा खटखटाया है। हमीदुल्ला ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को दिए प्रार्थना पत्र में आरोपियों के खिलाफ तत्काल प्रभावी कार्रवाई करने, मुकदमा दर्ज कराने और उसके परिवार की जान-माल की सुरक्षा का इंतजाम करने की मांग की है। उसने अधिकारियों से चकरोड पर कथित कब्जे की भी जांच कराकर सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने की मांग की है। साथ ही शिकायत में कहा गया है कि यदि उसके या उसके परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए शिकायत में नामजद लोगों को जिम्मेदार माना जाए।
चकरोड पर कथित कब्जे, सरकारी भूमि की स्थिति, मारपीट, तोड़फोड़, धमकी और अन्य आरोपों की वास्तविक स्थिति पुलिस एवं राजस्व विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। लेखपाल और ग्राम प्रधान पर लगाए गए आर्थिक लेनदेन व मिलीभगत के आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
