केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कोएम्प्ट एडुटेक को ठेका दिए जाने के संबंध में राहुल गांधी के आरोपों को खारिज कर दिया है। CBSE का यह बयान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) द्वारा मोदी सरकार से नई मूल्यांकन प्रणाली के लिए पोर्टल डिजाइन करने का ठेका पाने वाली कंपनी के बारे में चार सवाल पूछने के कुछ समय बाद आया है। CBSE ने राहुल गांधी के ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि कोएम्प्ट एडुटेक को ठेका दिए जाने के संबंध में लगाए गए आरोपों को CBSE खारिज करता है। ये आरोप गलत, भ्रामक और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।

CBSE ने आगे कहा कि CBSE ने एजेंसी को ठेका देने में सामान्य वित्तीय नियमों के प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया है। CBSE ने 28 अगस्त 2025 को केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल पर बोर्ड परीक्षा 2026 की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए निविदा (RFP) जारी की थी और योग्य बोलीदाता को ठेका दिया था। यह ट्वीट विपक्ष के नेता राहुल गांधी के उस आरोप के कुछ समय बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि “सीबीएसई परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर हेराफेरी हुई है, जिससे देश भर के लाखों बच्चे और उनके माता-पिता सदमे में हैं।”

 

इससे पहले राहुल गांधी ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओएसएम प्रणाली को लेकर जारी विवाद के बीच बुधवार को “पूरे घोटाले” के पीछे की सच्चाई उजागर करने के लिए स्वतंत्र न्यायिक व एसआईटी जांच मांग की और सवाल किया कि तेलंगाना में संदिग्ध रिकॉर्ड वाली कंपनी को बोर्ड ने किस वजह से ठेका दिया। केंद्र सरकार पर हमले तेज करते हुए गांधी ने कहा कि सीबीएसई के छात्र और उनके माता-पिता परेशान हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पास कहने के लिए कुछ नहीं है। सोशल मीडिया पर डाले गए एक वीडियो में गांधी ने कहा कि सीबीएसई की 12वीं कक्षा की परीक्षा के बारे में चौंकाने वाले विवरण सामने आ रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि परीक्षा के लिए ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) करने वाली सीओईएमपीटी वास्तव में ग्लोबरीना नाम की कंपनी थी। ग्लोबरीना ने पहले भी तेलंगाना में यह घोटाला दो बार किया है- एक बार 2019 में तेलंगाना की बोर्ड परीक्षा में और उसके बाद 2023 में। इन्हीं ओएसएम संबंधी त्रुटियों के कारण तेलंगाना में 23 युवाओं ने आत्महत्या की। उन्होंने कह कि यह सब जानकारी सार्वजनिक थी। यह सभी को पता था, फिर भी किसी गोपनीय कारण से सीबीएसई ने वही कंपनी फिर से चुनी। हमें यह पता लगाने में 30 सेकेंड लगे कि इस कंपनी का पहले कोई और नाम था। मुझे पूरा विश्वास है कि सीबीएसई और भारत सरकार के लोग इस कंपनी की पृष्ठभूमि से अवगत थे। उन्होंने सीबीएसई के छात्रों और उनके माता-पिता से अपील की कि वे उनका वीडियो साझा करें और उनके द्वारा उठाए गए सवाल सरकार और प्रधानमंत्री से पूछें।

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