नीरज प्रजापति

 

फूलबाग कॉलोनी के लोगों ने वन विभाग और नगर निगम के खिलाफ खोला मोर्चा, बोले, अब घरों से निकलना भी हुआ मुश्किल, डीएम से लगाई कार्रवाई की गुहार।

 

मेरठ। बंदरों के बढ़ते आतंक से परेशान फूलबाग कॉलोनी वार्ड-60 के लोगों का गुस्सा आखिरकार सड़क पर फूट पड़ा। समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए स्थानीय लोगों ने अनोखा विरोध प्रदर्शन करते हुए खुद बंदरों के मुखौटे लगाए और सड़कों पर उतरकर वन विभाग तथा नगर निगम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां और चेहरों पर बंदरों के मुखौटे लगाए प्रदर्शनकारियों ने जिम्मेदार विभागों से तत्काल समस्या का समाधान कराने की मांग उठाई।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि कॉलोनी में बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। स्थिति यह है कि लोगों को अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर लगने लगा है। बंदरों के झुंड कभी छतों पर तो कभी गलियों और सड़कों पर दिखाई देते हैं। इनके अचानक हमलावर होने के डर से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं की परेशानी सबसे अधिक बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं कराया गया।
स्थानीय लोगों ने कहा कि बंदरों के कारण घरों की छतों पर कपड़े सुखाना, बच्चों का बाहर निकलना और रोजमर्रा के काम तक मुश्किल हो गए हैं। कई लोग अपने घरों की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखने को मजबूर हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जब सामान्य शिकायतों से समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्हें इस अनोखे तरीके से प्रशासन को अपनी पीड़ा दिखाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
प्रदर्शनकारियों ने वन विभाग और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर बंदरों के आतंक से जनता को कब राहत मिलेगी। लोगों का कहना था कि विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय संयुक्त अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ने और समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी से भी मामले में तत्काल हस्तक्षेप की गुहार लगाई। उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो बंदरों के कारण किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
फूलबाग कॉलोनी में हुआ यह अनोखा प्रदर्शन अब प्रशासन के लिए भी बड़ा सवाल बन गया है कि आखिर जनता को बंदरों के आतंक से निजात कब मिलेगी।

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