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सभा में जयंत चौधरी ने कहा कि जो लोग मुझे एक चवन्नी भी नहीं मान रहे, कह रहे हैं कि चवन्नी हूं, मैं उनको बताना चाहता हूं, मैं तो चवन्नी भी नहीं। ब्रज रज की एक चुटकी लायक भी मैं अपने आप को नहीं मानता हूं, ब्रज की रज वो रज है, जहां देश-दुनिया से आदमी आता है और एक चुटकी ले कर अपने माथे पे लगाकर प्रसन्न होकर घर लौट जाता है। ब्रज के लाल मेरी लज्जा की रक्षा भी करेंगे।

उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री इथेनॉल का विरोध करते हैं? जो इथेनॉल गन्ने से बनेगा, आपके मक्का से बनेगा या आपकी धान से बनेगा, उसका विरोध करके तो आप सीधा किसानों का ही विरोध कर रहे हो। बिना सोचे-समझे बोलोगे, 24 घंटे व्यंग्य करोगे, बातों को गंभीरता से नहीं लोगे और रिश्ते निभाना नहीं सीखोगे, तो कौन साथ खड़ा होगा?”

उन्होंने कहा कि वीर गोकुला ने क्रूर शासक का विरोध करते हुए लड़ाई लड़ी थी। वर्ष 1670 में आगरा कोतवाली में उन्हें शहादत दी गई थी।

खुशी है कि शिक्षा विभाग ने एनसीईआरटी की कक्षा 9 की किताब में वीर गोकुला की गाथा दर्ज करने का फैसला लिया है।जयंत चौधरी ने कहा कि दो महीने पहले वह यहां आए थे, तब वीर गोकुला की मूर्ति का निर्माण हुआ था। आज इस सभा के बाद वह दोबारा वहां जाकर मूर्ति पर माला चढ़ाएंगे।

जयंत चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि मैं भारत सरकार में किसानों के प्रतिनिधि के तौर पर हैं। अगर वह वहां रहकर आलू किसानों के लिए काम नहीं कर पाए, तो ऐसी कुर्सी का कोई मतलब नहीं है।इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री से भी चर्चा की है। जयंत चौधरी ने किसानों को भरोसा दिलाया कि आलू उत्पादकों को राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर काम करेंगी। जयंत चौधरी ने कहा कि आगरा में अनुसंधान की एक बड़ी इकाई का निर्माण जल्दी पूरा होगा।

जयंत चौधरी बोले- सभा में आने की वजह चुनाव नहीं, पीढ़ियों का रिश्ता है

जयंत चौधरी ने कहा कि आगरा के एक गांव ने चौधरी अजित सिंह के सम्मान में अपना नाम अजीतगढ़ रखा। जैंगारा छोटा सा गांव है, लेकिन कप्तान भगवान सिंह जी,पूर्व मंत्री अजय सिंह जी जैसे बड़े विचारकों को जन्म दिया, उनको नमन करता हूँ और याद करता हूँ।वर्ष 1987 में, जब चौधरी चरण सिंह नहीं रहे थे और चौधरी अजित सिंह को राजनीति में आगे बढ़ाना था, तब आगरा में एत्मादपुर के निकट बगल घुसा गांव से लोगों का हुजूम पैदल लखनऊ की ओर रवाना हुआ इस तरह आगरा से हमारा पीड़ियों का रिश्ता है

पार्टी विधायकों की संख्या भले ही कम पर समर्पित कार्यकर्ता बड़ी संख्या में-जयंत

जयंत चौधरी ने कहा कि लोकदल के विधायकों की संख्या भले ही कम हो, लेकिन पार्टी के पास ईमानदार नेताओं और और प्रभावी ढंग से काम करने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की कोई कमी नहीं है, पार्टी मतदाताओं का सम्मान करती है।जयंत चौधरी ने कहा कि लोकदल के उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक भले ही कम हों, लेकिन जब सभी साथ थे, तब पार्टी तीन राज्यसभा सांसद जिताने की स्थिति में थी। अबकी बार केवल एक सांसद भेज पा रहे हैं।लोकदल के कार्यकर्ताओं ने तीन पीढ़ियों तक संघर्ष किया, लाठियां खाईं, फिर भी डटे रहे।पिछले दशकों में खुद भी इस संघर्ष को करीब से देखा है। इस क्षेत्र के लोग झुकना नहीं जानते,इस क्षेत्र में कई क्रांतिकारी हुए हैं। देश के लिए शहादत देने वाले और बड़ी कुर्बानी करने वालों के सामने ही वे शीश झुकाते हैं।ब्रज की इसी रज मैं बड़ा बड़ा किसान धरती मां के सम्मान में शीश झुकाता है। लेकिन किसी ऐरे-गैरे के सामने ये लोग झुकने वाले नहीं हैं।आज के कार्यक्रम और मंच का नाम भी इसी भावना के साथ रखा गया है

मंच पर पहुंचे रालोद प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी का कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। उन्हें फूलों की माला पहनाई गई। जयंत चौधरी ने भी हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन किया।रालोद प्रदेश अध्यक्ष ऐश्वर्य राज सिंह ने कहा- आप लोग जयंत चौधरी के कंधों को मजबूत करेंगे तो पूरा रालोद मजबूत होगा, पूरी एनडीए गठबंधन मजबूत होगा।

हमारे नेता जयंत चौधरी युवा हैं और युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से उठाते हैं।हम लोग जातियों की बात नहीं करते, हम लोग किसानी की बात करते हैं, भाईचारा और अवध की गंगा जमुनी तहजीब जब एक साथ मिल जाएगी तो पीडीए का पता नहीं चलने वाला, पीडीए साफ हो जाएगा।

रालोद एमएलसी योगेश नौहवार ने कहा कि जयंत चौधरी की बढ़ती लोकप्रियता और ताकत विपक्षियों को हजम नहीं हो रही और भी बेफिजूल बातें कर रहे हैं उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने किसान और मजदूरों के मसीहा चौधरी चरण सिंह के कदमों में बैठकर राजनीति सीखी, आज वही उनकी विरासत को नकारने में लगे हैं।

2002 के विधानसभा चुनाव में आगरा में राष्ट्रीय लोक दल ने जीती थी 2 सीटें-

एत्मादपुर सीट से गंगा प्रसाद पुष्कर और फतेहपुर सीकरी सीट से चौधरी बाबूलाल ने राष्ट्रीय लोक दल की टिकट पर चुनाव लड़ा और विजय हासिल की

By editor

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