भ्रष्टाचार रोधी ब्यूरो (एसीबी) ने फर्जी बिलों के जरिए 28 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में एक पूर्व खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) और एक ठेकेदार को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

एसीबी ने पूर्व बीडीपीओ पूजा शर्मा और ठेकेदार हीरालाल दोनों को शहर की एक अदालत में पेश किया। एसीबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हीरालाल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया, जबकि पूजा शर्मा को पूछताछ के लिए दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद, सरकार ने पूजा को निलंबित कर दिया। हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश के बाद वह फिर से अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने लगीं। गिरफ्तारी के समय वह नूंह जिले के पुन्हाना में बीडीपीओ का प्रभार संभाल रही थीं।

एसीबी अधिकारियों के अनुसार, फरीदाबाद के तत्कालीन उपायुक्त यशपाल यादव ने अप्रैल 2021 में बल्लभगढ़ के सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पूर्व उपायुक्त ने मामले की जांच के लिए पहले एक कमेटी गठित की थी।

प्राथमिकी में खुलासा हुआ कि जनवरी 2020 से मई 2020 के बीच मुजेड़ी गांव की पूर्व सरपंच रानी और निलंबित ग्राम सचिव विजयपाल ने बिना अनुमति के 2,32,46,767 रुपये निकाल लिए।

विस्तृत जांच में पता चला कि पंचायत को 69,01,936 रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। आरोप है कि पूर्व बीडीपीओ ने कार्यवाहक सरपंच ब्रह्मपाल और ग्राम सचिव जोगेंद्र के साथ मिलीभगत करके ऐसे विकास कार्यों के फर्जी बिल पेश करके 22 करोड़ रुपये का गबन किया, जो कभी हुए ही नहीं। इसमें से 17.14 करोड़ रुपये अकेले ठेकेदार को दिए गए। मामला 2023 में जांच के लिए एसीबी को सौंप दिया गया था।

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