यूपी के लखीमपुर खीरी से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यहां पर महेवागंज स्थित एक निजी अस्पताल में डिलीवरी से पहले ही एक महिला के गर्भस्थ शिशु की जान चली गई। बताया जा रहा है कि गोलदार नामक निजी अस्पताल ने कथित तौर पर पैसे न मिलने पर गर्भवती महिला को अस्पताल से बाहर कर दिया। इलाज न होने की वजह से गर्भ में पल रहे नवजात की जान चली गई। जिसके बाद उसका लाचार पिता बच्चे के शव को थैले में भरकर DM ऑफिस पहुंचा है। 

‘आप ही बताओ मैं इसकी मां को क्या जवाब दूंगा…’
बता दें कि नवजात का शव थैले में  भरकर पिता विपिन गुप्ता रोता-बिलखता हुआ डीएम दफ्तर पहुंच गया। वहां बैठक कर रहे सीडीओ अभिषेक कुमार और सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने गलत इलाज का आरोप लगाने वाले विपिन की व्यथा सुनी। रोता बिलखता पिता कह रहा था कि ‘साहब मेरे बेटे को जिंदा कर दो, आप ही बताओ अब मैं इसकी मां को क्या जवाब दूंगा…। इसकी मां दूसरे अस्पताल में भर्ती है। उसे बताया है कि बच्चे की हालत ठीक नहीं है, इसलिए दूसरी जगह भर्ती कराया है। आप ही बता दो कि इसकी मां को क्या जवाब दें।” लाचार पिता की बातें सुनकर अधिकारियों के भी दिल पसीज गए। 

‘पैसे की कमी से नहीं किया इलाज’
आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने शुरुआत में नॉर्मल डिलीवरी के लिए 10 हजार रुपये और ऑपरेशन के लिए 12 से 25 हजार रुपये तक मांगे। परिवार वालों ने करीब 8 हजार जमा कर दिए। लेकिन, जैसे-जैसे रात बढ़ी, अस्पताल स्टाफ ने रकम 25 हजार रुपये तक पहुंचा दी। जब पैसे पूरे नहीं दिए गए तो महिला को स्ट्रेचर पर बाहर छोड़ दिया गया। आरोप है कि इलाज नहीं मिलने से बच्चे की गर्भ में ही मौत हो गई। 

अस्पताल हुआ सील 
पीड़ित पिता की गुहार सुनकर सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता और एसडीएम सदर अश्विनी कुमार सिंह दलबल के साथ गोलदार अस्पताल पहुंचे। इस मामले में टीम ने जांच शुरू की। जांच पूरी होने के बाद डीएम को मामले से अवगत कराया। डीएम के निर्देश पर अस्पताल को सील कर दिया गया। वहीं, अस्पताल में भर्ती तीन मरीजों को जिला महिला अस्पताल शिफ्ट कराया, ताकि सबका इलाज अच्छे से हो। 

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