ऋषिकेश, 16 अगस्त । परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष एवं परमार्थ पीठाधीश्वर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रचेतना के अद्भुत समन्वय में निहित है। रामकृष्ण परमहंस ने भारत की आध्यात्मिक आत्मा को जागृत किया, जबकि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राष्ट्रीय स्वाभिमान को सशक्त स्वर दिया।
रामकृष्ण परमहंस और अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर रविवार को परमार्थ निकेतन की ओर से दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्वामी चिदानन्द ने कहा कि दोनों का जीवन अपने-अपने क्षेत्र में भारत की सनातन चेतना, मानवता और उच्च आदर्शों का प्रकाश स्तंभ रहा है।
उन्होंने कहा कि रामकृष्ण परमहंस ने आत्मसाक्षात्कार, प्रेम, भक्ति, करुणा और सर्वधर्म समभाव का संदेश दिया। उनका जीवन यह बताता है कि आध्यात्मिकता केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि प्रेम, करुणा, आत्मबोध और समस्त मानवता में परमात्मा के दर्शन की यात्रा है। उनका सर्वधर्म समभाव आज भी विश्व को शांति, सद्भाव और एकात्मता का मार्ग दिखाता है।
स्वामी चिदानन्द ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन आधुनिक भारत की राष्ट्रचेतना का सशक्त अध्याय है। उन्होंने राजनीति को सत्ता नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उनके व्यक्तित्व में विचारों की दृढ़ता के साथ हृदय की कोमलता, राष्ट्रभक्ति के साथ मानवीय संवेदना और नेतृत्व के साथ लोकतांत्रिक मर्यादा का अद्भुत समन्वय था।
उन्होंने कहा कि अटल जी की वाणी में राष्ट्र का स्वाभिमान और हृदय में भारत की आत्मा थी। उनकी कविताओं में संघर्ष के बीच आशा, निराशा के बीच संकल्प और अंधकार के बीच प्रकाश की खोज दिखाई देती है।स्वामी चिदानन्द ने कहा कि रामकृष्ण परमहंस की आध्यात्मिक दृष्टि और अटल जी की राष्ट्रदृष्टि आज की पीढ़ी को अपने भीतर जागरण और कर्मों से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा का संदेश देती है। दोनों महापुरुषों का जीवन आध्यात्मिक जागरण, सेवा, संस्कार और राष्ट्रनिर्माण के लिए प्रेरणास्रोत है।
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