–अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव है: मीनाक्षी स्वरूप
मुजफ्फरनगर। उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम और महिला आरक्षण बिल-2026 के विरोध को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है।
गुरुवार को रुड़की रोड स्थित होटल ग्रीन एप्पल में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन रजी के पदाधिकारियों ने मीडिया सेंटर के पत्रकारों से वार्ता करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करने पर विपक्ष पर जमकर तंज कसे। इस दौरान संगठन की ओर से एक सख्त निंदा प्रस्ताव पारित करते हुए इंडी गठबंधन के दलों द्वारा महिला आरक्षण बिल का विरोध किए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण, महिला विरोधी और समाज के समग्र विकास में बाधक बताया गया। वार्ता के दौरान नगर पालिका चेयर पर्सन मीनाक्षी स्वरूप ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के मुद्दे पर राजनीति करना देश और समाज दोनों के लिए घातक है। उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं वर्षों से सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक असमानताओं का सामना करती रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 और महिला आरक्षण बिल-2026 महिलाओं को राजनीति में समान भागीदारी दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। वहीं प्रदेश उपाध्यक्ष, मंडल प्रभारी जिला सहसंयोजक केंद्र व राज्य शासकीय विभाग भाजपा कृष्ण गोपाल मित्तल ने कहा कि इस कानून के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे देश की आधी आबादी को निर्णय लेने की प्रक्रिया में सशक्त भागीदारी मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम केवल एक कानून नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की मजबूत नींव है। इसके जरिए महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, सुरक्षा और नेतृत्व के अवसरों में मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय लेने की प्रक्रिया में आगे आएंगी, तभी समाज और राष्ट्र का संतुलित विकास संभव हो सकेगा।
उद्योग व्यापार संगठन ने कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और डीएमके सहित इंडी गठबंधन के दलों पर महिला सशक्तिकरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से देखने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह रवैया महिलाओं के प्रति उनकी संकीर्ण सोच को उजागर करता है। संगठन ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल समय-समय पर अपने बयानों और विरोध के माध्यम से महिलाओं का अपमान करते रहे हैं और अब महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक कदम का विरोध कर उन्होंने अपनी मानसिकता को फिर उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार किसी एक राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की प्रगति का सवाल हैं। महिला सशक्तिकरण को राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर देखने की आवश्यकता है। यदि महिलाओं को समान अवसर और प्रतिनिधित्व मिलेगा तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
उ०प्र० उद्योग व्यापार संगठन ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक संसाधन, जागरूकता अभियान और मजबूत निगरानी तंत्र विकसित किया जाए, ताकि इस ऐतिहासिक कानून का लाभ देश की हर महिला तक पहुंच सके। पत्रकार वार्ता में मुख्य रूप से गौरव स्वरूप, कृष्ण गोपाल मित्तल, सरदार बलविंदर सिंह, राकेश त्यागी, संजय मिश्रा, विशाल जैन, डॉ तुलसी भारद्वाज, पवन वर्मा, तरुण मित्तल, आनंद गुप्ता, शिव कुमार सिंघल, दीपांशु कुछचाल, विजय प्रताप, भूपेंद्र गोयल, मयंक गोयल, राजेंद्र अरोरा, उदित किंगर, विक्की अरोरा, सुनील वर्मा, रोहित अरोरा, अंशुल सिंघल, अरुण कुछल, अमित गुप्ता, अनिल कुमार, प्रमोद गर्ग, राजन माहेश्वरी, निवेश कुमार, शालिनी कौशिक, मेनका शर्मा, कल्पना ठाकुर, पिंकी चौधरी, रेनू वर्मा, गीता ठाकुर, रीना जैन, सोनू ठाकुर, गीता गुज्जर, कोमल कश्यप, कविता धीमान, सुधा आदि मौजूद रहे।
