उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में (बुंदेलखंड) प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में बड़े स्तर पर घोटाले का खुलासा हुआ है। जिले में कुछ शातिर लोगों ने नदी, पहाड़, रास्ता, बंजर जमीन और सरकारी भूमि को निजी खेत बताकर फसल बीमा करवा लिया। इस फर्जीवाड़े से असली किसान योजना के लाभ से वंचित रह गए।

कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया कि गांव की नदी, तालाब, पहाड़ और रास्तों को झूठे दस्तावेजों के सहारे खेत बताया गया। इसके आधार पर इन फर्जी खेतों का प्रधानमंत्री फसल बीमा करवाया गया। बीमा का पैसा असली किसानों को नहीं, बल्कि इन फर्जी दावेदारों को मिला।

जांच कब और कैसे शुरू हुई?
किसानों की शिकायतों और प्रदर्शनों के बाद प्रशासन हरकत में आया। जिलाधिकारी (DM) गजल भारद्वाज के निर्देश पर जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि कई सरकारी और ग्राम समाज की जमीनों को खेत बताकर बीमा कराया गया।

किसके खिलाफ दर्ज हुआ मामला?
लेखपाल प्रदीप सिंह की शिकायत पर अजनर थाना में केस दर्ज हुआ। आरोपियों में सुगर पुत्र हगुवा – रास्ता को खेत बताकर बीमा कराया, कृष्णा – पहाड़ को खेत बताया, चंद्रशेखर – तालाब को खेत बताकर बीमा करवाया।

पनवाड़ी थाना क्षेत्र (ग्राम सिमरिया)
लेखपाल मनोज कुमार की तहरीर पर केस दर्ज हुआ। आरोपियों में अनिल कुमार और गायत्री देवी – बंजर जमीन को खेत बताया, हिमांशु पुत्र घनश्याम – नदी को खेत बताया, राहुल कुमार, अर्जुन सिंह, अर्चना और इंद्रपाल – सभी ने झूठे दस्तावेजों से फर्जी बीमा कराया।

कानूनी कार्रवाई
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 318(4), 338, 336(3) और अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। अब तक दोनों मामलों में कुल 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ है, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं।

किसानों में गुस्सा क्यों?
असली किसानों का कहना है कि जब उनकी फसल बर्बाद हो गई, तब भी उन्हें बीमा का मुआवजा नहीं मिला। उल्टा, कुछ चालाक लोगों ने फर्जी खेत बनाकर लाखों रुपये का लाभ उठा लिया। किसानों ने आंदोलन की चेतावनी दी है और जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की मांग की है।

लेखपालों की भूमिका सराहनीय
कुलपहाड़ और पनवाड़ी क्षेत्र के लेखपालों ने ही सबसे पहले इस फर्जीवाड़े की जानकारी दी। उनकी सतर्कता और तहरीरों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। वरना, शायद यह घोटाला कभी सामने ही ना आता।

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