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नई दिल्ली, 28 सितंबर । दाहिने घुटने की चोट के बावजूद भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली पिंकी बलहारा ने कहा है कि एशियन खेल में उनका तीसरा पदक जीतने के बाद उनका सफर खत्म नहीं हुआ है। 28 वर्षीय पिंकी ने एशियन खेल-2026 की कुराश स्पर्धा के महिलाओं के 78 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक अपने नाम किया।

पिंकी को सेमीफाइनल मुकाबले में दक्षिण कोरिया की सुमिन मो के खिलाफ 0-5 से हार का सामना करना पड़ा। दाहिने घुटने पर लगी चोट के कारण उनका पैर बुरी तरह बंधा हुआ था। सुमिन ने उनकी चोट को निशाना बनाया और भारतीय खिलाड़ी की आक्रामक रणनीति को रोकते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया।

सेमीफाइनल में हार के बावजूद पिंकी ने अपने प्रदर्शन पर संतोष जताया। साई मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं अंक नहीं गंवाने के लिए पूरी तरह दृढ़ थी। सुमिन मेरी कमजोरी जानती थी और उसने उसका अच्छी तरह फायदा उठाया।” यह पिंकी का एशियन खेल में दूसरा पदक है। इससे पहले उन्होंने 2018 जकार्ता एशियन खेल में रजत पदक जीता था। 2022 हांगझोऊ एशियन खेल में वह क्वार्टर फाइनल में हारकर पदक से चूक गई थीं।

पिंकी 2015 में जूनियर एशियन चैंपियन रह चुकी हैं। उन्होंने 2024 में वर्ल्ड नोमैड खेल में स्वर्ण पदक जीता था और वह कई बार की राष्ट्रीय चैंपियन भी हैं। उन्होंने भारत में कुराश को पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए पिंकी ने कहा, “मीडिया के एक वर्ग ने 2018 एशियन खेल से पहले मेरे पिता की मौत को लेकर मेरे परिवार पर सवाल उठाए थे। मैंने पदक (रजत) जीतकर उन्हें गलत साबित किया। वह आग आज भी मेरे अंदर है। जाट लड़की का खून बहुत गर्म होता है और यही मुझे मुश्किल परिस्थितियों से लड़ते रहने की ताकत देता है।”

अपने भविष्य को लेकर पिंकी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “बहुत से लोग कह रहे हैं कि मेरे तीसरे एशियन खेल के बाद मेरा करियर खत्म हो गया है। मैं मानती हूं कि पदक का रंग वह नहीं है, जिसकी मैंने उम्मीद की थी, लेकिन मैं अभी रुकने वाली नहीं हूं। मैंने पिछले आठ वर्षों में इस पदक के लिए बहुत मेहनत की है।” पिंकी ने भी बड़े आयोजनों से पहले विदेशी प्रशिक्षण शिविरों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “2018 एशियन खेल से पहले भारतीय खिलाड़ियों ने उज्बेकिस्तान में 19 दिन का शिविर लगाया था। वहां कठिन प्रशिक्षण ने हमारी काफी मदद की। हमने प्रतिस्पर्धी बनना सीखा और यह हमने कठिन तरीके से किया। बड़े आयोजनों से पहले हमें ऐसे और शिविरों की जरूरत है।”

भारतीय कुराश संघ के अध्यक्ष रवि कपूर ने टीम को पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय अनुभव और प्रशिक्षण नहीं मिलने की बात कही। कपूर ने कहा, “हम एशियन खेल से पहले अंतरराष्ट्रीय अनुभव और प्रशिक्षण मिलने पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते थे। हमें सरकार से काफी सहयोग की जरूरत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का खेल को करियर के विकल्प के रूप में बनाने का विजन खिलाड़ियों पर भी प्रभाव डालना चाहिए।”

कपूर ने बताया कि कुराश को वर्ष 2000 में संगठित तरीके से बढ़ावा मिलना शुरू हुआ था। उन्होंने कहा, “कुराश की शुरुआत संगठित तरीके से वर्ष 2000 में हुई और 26 वर्षों में खिलाड़ियों ने भारत के लिए पदक जीते हैं। पिंकी जैसी कई खिलाड़ी जूडो से कुराश में आईं और उन्होंने देश के लिए पदक जीते। हमने लगभग अपनी जेब से संघ चलाया है। हमें सिर्फ सरकार के सहयोग की जरूरत है, ताकि हम आगे बढ़ सकें और अगले एशियन खेल में इससे कहीं बेहतर प्रदर्शन कर सकें।”

कुराश मध्य एशिया, खासकर उज्बेकिस्तान से निकली एक मार्शल आर्ट है। इसमें खिलाड़ी जैकेट पहनकर मुकाबला करते हैं और प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर गिराकर अंक हासिल करते हैं। एशियन खेल से पहले छह सदस्यीय भारतीय कुराश टीम ने सहारनपुर में एक छोटा प्रशिक्षण शिविर लगाया था।

By editor

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