नीरज प्रजापति
भोले-भाले लोगों की आईडी पर सिम कार्ड लेकर विदेश में बैठे साइबर अपराधियों को देते थे OTP, भारत में साइबर फ्रॉड कराने के नेटवर्क से जुड़े तार; दो मोबाइल फोन बरामद।
मुजफ्फरनगर। साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए अब मोबाइल सिम कार्ड और WhatsApp अकाउंट को हथियार बनाना शुरू कर दिया है। भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनकी आईडी पर सिम कार्ड हासिल करना और फिर उन नंबरों पर आने वाले WhatsApp OTP को विदेश में बैठे साइबर अपराधियों तक पहुंचाना इसी खतरनाक नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है। थाना साइबर क्राइम पुलिस ने ऐसे ही एक कथित साइबर अपराधी गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि दोनों आरोपी सिम कार्ड और OTP उपलब्ध कराकर भारत में साइबर फ्रॉड कराने वाले नेटवर्क की मदद कर रहे थे। साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं। थाना साइबर क्राइम पुलिस की कार्रवाई से साइबर अपराध के उस तरीके का खुलासा हुआ है, जिसमें आम लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर ठगी के लिए डिजिटल रास्ता तैयार किया जाता है। आरोपियों पर भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनकी आईडी पर सिम कार्ड प्राप्त करने का आरोप है। इसके बाद इन सिम कार्डों पर WhatsApp सक्रिय कराने के लिए आने वाले वन टाइम पासवर्ड (OTP) विदेश में बैठे अपने साथियों को भेजे जाते थे।
पुलिस के अनुसार, विदेशी नेटवर्क से जुड़े साइबर अपराधी इन OTP के जरिए WhatsApp अकाउंट में लॉगिन करते थे और फिर भारत में साइबर फ्रॉड की वारदातों को अंजाम देने के लिए इन खातों का इस्तेमाल किया जाता था। इस तरीके में जिस व्यक्ति की आईडी पर सिम जारी होता है, उसे यह तक पता नहीं चल पाता कि उसके नाम पर जारी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किस तरह की गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इस मामले में थाना साइबर क्राइम मुजफ्फरनगर की टीम ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से दो मोबाइल फोन बरामद हुए हैं, जिन्हें पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बताया है। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि इसमें स्थानीय स्तर पर सिम कार्ड और OTP उपलब्ध कराने वालों तथा विदेश में बैठे साइबर अपराधियों के बीच संपर्क होने की बात सामने आई है। पुलिस अधीक्षक अपराध इंदु सिद्धार्थ ने इस कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी गई। मामले में आरोपियों की भूमिका, विदेशी संपर्कों और कथित साइबर फ्रॉड नेटवर्क की विस्तृत जानकारी पुलिस जांच के आधार पर सामने आएगी।
