मुद्ग़ल टाइम्स ब्यूरो।

हत्या, दुष्कर्म, दंगा, पेपर लीक, साइबर ठगी और गैंगस्टर एक्ट समेत कई मामलों में अभ्यर्थियों पर गिरेगी अपात्रता की गाज; संवेदनशील पदों पर नियुक्ति से पहले होगी गहन जांच, गलत जानकारी देने पर नौकरी भी जाएगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अब केवल लिखित परीक्षा और चयन प्रक्रिया में सफल होना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनका आपराधिक रिकॉर्ड और चरित्र भी नियुक्ति की राह तय करेगा। प्रदेश सरकार ने सरकारी सेवाओं में भर्ती के दौरान चरित्र सत्यापन की व्यवस्था को सख्त करते हुए नई नीति जारी की है। इसके तहत हिंसा, गंभीर अपराध, भ्रष्टाचार, साइबर ठगी, पेपर लीक और संगठित अपराध जैसे मामलों में संलिप्तता रखने वाले अभ्यर्थियों के सरकारी नौकरी पाने पर रोक लगाने के प्रावधान किए गए हैं। इस कदम को सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता और भरोसे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रमुख सचिव एम. देवराज की ओर से बुधवार को जारी नीति का दायरा केवल सरकारी विभागों तक सीमित नहीं रहेगा। निगमों, परिषदों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वायत्त निकायों, सरकारी उपक्रमों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती पर भी इसके प्रावधान लागू होंगे। पहले से लंबित मामलों का निस्तारण भी नई नीति के अनुसार किया जाएगा। नई व्यवस्था में हत्या, बलवा, दुष्कर्म, दहेज हत्या, फिरौती के लिए अपहरण, पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध, देशद्रोह, पेपर लीक, नकल कराने वाले गिरोह, सॉल्वर गैंग और फर्जी प्रमाणपत्र जैसे मामलों को गंभीरता से शामिल किया गया है। डिजिटल अरेस्ट और यूपीआई ठगी जैसे साइबर अपराधों के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) तथा गैंगस्टर एक्ट से जुड़े मामलों में भी निर्धारित शर्तें पूरी होने पर अभ्यर्थी सरकारी नौकरी के लिए अपात्र हो सकते हैं। केंद्र या राज्य सरकार की सेवा से बर्खास्त किए गए व्यक्तियों पर भी अपात्रता के प्रावधान लागू होंगे। गंभीर अपराधों में दोषसिद्धि अथवा नीति में निर्धारित मामलों में अदालत द्वारा आरोप तय होने की स्थिति में भी नियुक्ति का रास्ता बंद हो सकता है। चरित्र सत्यापन के लिए अभ्यर्थी के गृह जिले के अलावा उन जिलों से भी जानकारी जुटाई जाएगी, जहां वह पिछले पांच वर्षों के दौरान एक साल से अधिक समय तक रहा हो। पुलिस महानिदेशक (अभिसूचना) के स्तर से भी सत्यापन कराया जाएगा। सामान्य मामलों में पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर जांच की जा सकेगी और प्रत्येक अभ्यर्थी की भौतिक उपस्थिति या पूछताछ अनिवार्य नहीं होगी। हालांकि, संवेदनशील और सुरक्षा से जुड़े पदों पर नियुक्ति से पहले विस्तृत जांच जरूरी होगी। चरित्र सत्यापन पूरा होने से पहले कुछ मामलों में प्रोविजनल नियुक्ति का विकल्प भी रखा गया है। अभ्यर्थियों को आवेदन में गिरफ्तारी, अभियोजन, दोषसिद्धि, पिछली नौकरी से बर्खास्तगी और किसी आयोग या भर्ती बोर्ड की ओर से लगाए गए प्रतिबंध जैसी जानकारियां देना अनिवार्य होगा। कोई तथ्य छिपाने या गलत जानकारी देने पर नियुक्ति रद्द की जा सकती है। प्रतिकूल पुलिस रिपोर्ट मिलने पर अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी अभ्यर्थी को नौकरी से वंचित नहीं किया जाएगा। हालांकि, हिंसक तरीके से मौजूदा सामाजिक व्यवस्था बदलने के घोषित उद्देश्य वाले संगठनों की सदस्यता रखने वालों की पात्रता प्रभावित हो सकती है। नई नीति के बाद सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता के साथ अभ्यर्थी के आचरण, आपराधिक पृष्ठभूमि और सत्यापन रिपोर्ट की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights