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मीरजापुर, 04 जून । हलिया क्षेत्र के प्रसिद्ध गड़बड़ा शीतला धाम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ और संगीतमय रामकथा के दूसरे दिन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक चिंतन का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में जुटे सैकड़ों श्रद्धालु उस समय भाव-विभोर हो उठे, जब कथा व्यास यज्ञाचार्य धीरज द्विवेदी ने भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों का मार्मिक वर्णन किया।

भगवान परशुराम अखाड़ा प्रयागराज और गड़बड़ा धाम ग्राम समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित रामकथा में यज्ञाचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम स्वयं ईश्वर होते हुए भी पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए 14 वर्षों तक वनवास स्वीकार कर लिया। यही कारण है कि राम केवल पूजे नहीं जाते, बल्कि उनके चरित्र को जीवन का आदर्श माना जाता है।

उन्होंने कहा कि आज के दौर में लोग पद, प्रतिष्ठा और स्वार्थ के लिए रिश्तों को पीछे छोड़ देते हैं, जबकि राम का जीवन सिखाता है कि वचन, कर्तव्य और मर्यादा किसी भी व्यक्ति के सबसे बड़े आभूषण हैं। यदि हर व्यक्ति अपनी मर्यादा में रहकर जीवन जिए तो परिवार और समाज कभी विखंडित नहीं होगा।

कथा के दौरान यज्ञाचार्य ने कहा, रामायण सिर्फ एक धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का संविधान है। राम ने सिखाया कि राजा प्रजा का सेवक होता है। भरत ने बताया कि सत्ता सेवा का माध्यम है, भोग का नहीं। वहीं हनुमान जी का चरित्र निस्वार्थ सेवा और समर्पण की सर्वोच्च मिसाल है।

उन्होंने अयोध्या कांड का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब महाराज दशरथ ने श्रीराम को युवराज बनाने का निर्णय लिया तो पूरी अयोध्या उत्सव में डूब गई थी। लेकिन मंथरा की कुटिल सलाह ने कैकेयी के मन में ऐसा विष घोला कि राम को वनवास और भरत को राजगद्दी मांग ली गई, जिससे अयोध्या आनंद से शोक के सागर में डूब गई।

कथा के दौरान राम, भरत और हनुमान के आदर्शों का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ के उद्घोष से गूंजता रहा और भक्त भक्ति रस में सराबोर दिखाई दिए।

इस अवसर पर पूर्व प्रधान शिव गरुड़ तिवारी, पूर्व प्रधान कृष्णा दूबे, पूर्व मंडल अध्यक्ष ज्ञानेश्वर दूबे, रविशंकर तिवारी, दिनेश तिवारी सहित क्षेत्र के गणमान्य लोग एवं सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने धर्म, संस्कार और मर्यादा के संदेश को जीवन में उतारने का संकल्प लिया।

By editor

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