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बलरामपुर, 06 जुलाई । उत्तर प्रदेश में जनपद बलरामपुर के तुलसीपुर स्थित राज्यानुदानित मदरसा जामिया अनवारुल उलूम में एक ही पद पर दो-दो नियुक्तियां किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। इस प्रकरण के सामने आने के बाद अधिकारियों की कार्यशैली व मदरसा प्रबंधन सवालों के घेरे में है।

मिली जानकारी के अनुसार मदरसा जामिया अनवारुल उलूम में वर्ष 2022 में शिक्षक गुलाम जिलानी के सेवानिवृत्त होने के बाद उनके रिक्त पद पर नियुक्ति की गई। वर्ष 2022 में हामिद रजा की नियुक्ति 09 मई 2022 को हुई, जबकि उनके नियुक्ति पत्र पर अनुमोदन 14 मई 2022 को बताया जाता है।

आरोप है कि इसी पद पर वर्ष 2025 में मदरसा प्रबंधन द्वारा कथित रूप से कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर मोहम्मद अहमद अंसारी नाम के शिक्षक की भी नियुक्ति कर दी गई।

हैरानी की बात यह है कि इनकी नियुक्ति 19 अप्रैल 2025 को एवं परिषद द्वारा इस पद के सापेक्ष अनुमोदन/वित्तीय सहमति भी 13 मई 2025 को दर्शाया गया है। एक ही पद पर दो नियुक्तियां होने से मदरसा प्रबंधन के साथ-साथ जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है, क्योंकि वित्तीय स्वीकृति विभागीय संस्तुति के बाद ही संभव होती है।

सोमवार को पहले नियुक्त शिक्षक हामिद रजा ने बताया कि वर्ष 2022 में उनकी विधिवत नियुक्ति हुई थी। उन्होंने न तो कभी इस्तीफा दिया और न ही उनका पद रिक्त हुआ। उनका कहना है कि वर्ष 2023 तक उनके नाम के साथ वेतन बिल भी प्रस्तुत किया गया, लेकिन वेतन भुगतान नहीं कराया गया।, दूसरी नियुक्ति होने के बाद मदरसा प्रबंधन उनका वेतन जारी नहीं कर रहा है। इस संबंध में उन्होंने उच्च अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है।

मदरसे से जुड़े लोगों ने अपना नाम प्रकाश में न आने की शर्त पर बताया कि दोनों नियुक्तियां तत्कालीन प्रबंधक अहमदुल कादरी के कार्यकाल में हुईं। उल्लेखनीय है कि अहमदुल कादरी पहले से चर्चित 11 करोड़ रुपये के एमडीएम घोटाले के आरोपित हैं और उनके विरुद्ध मुकदमा भी दर्ज है। ऐसे में यह मामला सामने आने के बाद उनका नाम फिर चर्चा में है।

इस संबंध में जब मदरसा प्रबंधक अहमदुल कादरी से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वह पहले ही प्रबंधक पद से इस्तीफा दे चुके हैं और इस विषय पर मदरसे के लिपिक अजीज अंसारी से जानकारी लेने को कहा।

वहीं, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी यशवंत मौर्य ने बताया कि पहले नियुक्त शिक्षक द्वारा इस्तीफा दे दिया गया था। हालांकि हामिद राजा ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने कभी इस्तीफा नहीं दिया।

पूरे मामले पर विशेष सचिव/निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ़ शीलधर सिंह यादव ने कहा कि प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर संबंधित दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

By editor

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