सेवन सीटर कार बनी मोबाइल अल्ट्रासाउंड सेंटर, 20 हजार रुपये लेकर गर्भ में पल रहे शिशु का बताते थे लिंग; कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
गाजियाबाद। कन्या भ्रूण हत्या जैसी गंभीर सामाजिक बुराई को बढ़ावा देने वाले एक बड़े अवैध लिंग परीक्षण रैकेट का गाजियाबाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने भंडाफोड़ किया है। महामाया फ्लाईओवर के पास की गई छापेमारी में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए सेवन सीटर कार को ही मोबाइल अल्ट्रासाउंड सेंटर बनाकर गर्भवती महिलाओं का अवैध लिंग परीक्षण करता था।
पुलिस के अनुसार गिरोह का नेटवर्क केवल गाजियाबाद तक सीमित नहीं था, बल्कि कई राज्यों तक फैला हुआ था। आरोपी गर्भवती महिलाओं तक पहुंचने के लिए दलालों का सहारा लेते थे। दलाल महिलाओं और उनके परिजनों से संपर्क कर उन्हें लिंग परीक्षण के लिए तैयार करते थे और फिर तय स्थान पर बुलाकर कार के भीतर ही जांच की जाती थी, ताकि किसी को शक न हो।
जांच में यह भी सामने आया कि एक लिंग परीक्षण के बदले करीब 20 हजार रुपये वसूले जाते थे। इस रकम में गिरोह के प्रत्येक सदस्य को लगभग 3 हजार रुपये कमीशन दिया जाता था, जबकि बाकी राशि सरगना और नेटवर्क के संचालन में खर्च होती थी। पुलिस का मानना है कि इस अवैध कारोबार से गिरोह लंबे समय से लाखों रुपये की कमाई कर रहा था।
महामाया फ्लाईओवर के पास हुई कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन सहित अन्य महत्वपूर्ण उपकरण और साक्ष्य बरामद किए हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पूरी कार्रवाई के दौरान मौजूद रही और बरामद उपकरणों की जांच की जा रही है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है। उनसे मिले इनपुट के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, दलालों, संभावित सहयोगियों और इस अवैध कारोबार को संरक्षण देने वालों की तलाश की जा रही है। कई राज्यों में फैले इस नेटवर्क के तार खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही अन्य गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
गौरतलब है कि भारत में भ्रूण के लिंग की जांच और उसकी जानकारी देना कानूनन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद ऐसे गिरोह समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथा को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पूरे रैकेट का पर्दाफाश होने तक जांच जारी रहेगी।
