हमीरपुर, 10 अक्टूबर । उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में पितृपक्ष में एक पखवारे तक निकाली गयी महाबुलियों का शनिवार को दोपहर बाद श्रद्धा एवं उत्साह के साथ समापन हो गया। आखिरी दिन कन्याओं ने भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा जी के बाल रूप को धारण कर महा बुलियां का समापन किया।
जिले में मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने कंस वध के बाद उन नौनिहाल बच्चों का तर्पण किया था, जिनका वध श्रीकृष्ण के जन्म के बाद कंस के आदेश पर उनके दूत अधासुर, बकासुर व पूतना ने मथुरा आदि स्थानों पर घूम-घूम कर किया था। भगवान श्रीकृष्ण जरिये की गयी तर्पण की यह प्रथा कलियुग में बुन्देलखण्ड के गांव-गांव में महा बुलियां के रूप में आज के इस आधुनिक दौर में भी विद्यमान है। पितृ विसर्जन अमावस्या के मौके पर महा बुलियां का अंतिम तर्पण किया गया। महा बुलियां को फूलों से पिरोने की शुरुआत गीत के माध्यम से हुयी।
महा बुलियां सजाते समय कन्याओं ने लावा-लावा गुलाब के पूल सजइमैं, सुन्दर महा बुलियां से की। इसके बाद कन्याओं ने श्रीकृष्ण राधा का वेश बनाया और फूलों से सजी महा बुलियां को गाजेबाजे के साथ नदी व सरोवरों में जाकर विसर्जित कर दिया। इसकी के साथ महा बुलियां का अंतिम तर्पण भी हो गया। अंतिम दिन महा बुलियां देखने के लिये नदी और सरोवरों के किनारे महिलाओं व पुरुषों की भारी भीड़ एकत्र हुयी। समाजसेवी भोला तिवारी, प्रो.डा.भवानीदीन प्रजापति, सेवानिवृत्त शिक्षक, कवि गणेश सिंह विद्यार्थी ने बताया कि पितृपक्ष में निकाली जाने वाली महा बुलियां का सम्बन्ध तर्पण से ही। इस परम्परा के तहत भूले बिसरे अनजान आत्माओं का तर्पण कर मोक्ष का मार्ग प्रशस्त किया जाता है।
