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लखनऊ, 27 जुलाई । पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं को आधुनिक और उन्नत सुविधाओं से युक्त बनाने की दिशा में योगी सरकार ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। प्रदेश की प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस आदर्श पशु चिकित्सालय स्थापित किए जाएंगे, जहां पशुओं को सामान्य उपचार से लेकर जटिल और गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं वाली चिकित्सा सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगी। इन अस्पतालों में डायलिसिस, एक्स-रे, आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, आंखों की सर्जरी, हड्डी टूटने पर ऑर्थोपेडिक सर्जरी और गंभीर रूप से बीमार पशुओं को अस्पताल में भर्ती कर इलाज करने की व्यवस्था होगी। भर्ती पशुओं के भोजन, देखभाल और रिकवरी तक का पूरा प्रबंध भी अस्पताल परिसर में किया जाएगा। प्रत्येक आदर्श पशु चिकित्सालय पर तीन करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए जाएंगे।

आधुनिक उपचार की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी : धर्मपाल सिंह

पशुधन और दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने बताया कि प्रदेश में पहली बार इस स्तर की व्यापक योजना तैयार की गई है। उन्होंने बताया कि यह पहल प्रदेश के लाखों पशुपालकों के लिए बड़ी सुविधा साबित होने वाली है। अभी तक गंभीर बीमारियों या जटिल सर्जरी के लिए पशुपालकों को बड़े शहरों या चुनिंदा संस्थानों का रुख करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद आधुनिक उपचार की सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी।

प्रदेश के सभी जिलों में मिलेगी यह सुविधा

योजना के तहत प्रत्येक आदर्श पशु चिकित्सालय को आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। अस्पतालों में डायलिसिस यूनिट, डिजिटल एक्स-रे, ऑपरेशन थिएटर, रिकवरी वार्ड और भर्ती वार्ड बनाए जाएंगे। आंखों की बीमारियों का इलाज और ऑपरेशन भी यहीं होगा, जबकि दुर्घटना या फ्रैक्चर की स्थिति में पशुओं का सफल उपचार किया जा सकेगा। प्रदेशभर के जिलों में यह सुविधा मिलने जा रही है।

उपचार की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी

योगी सरकार ने अस्पतालों में गंभीर पशुओं की भर्ती की भी विशेष व्यवस्था की है। इलाज के दौरान पशुओं के लिए संतुलित भोजन, साफ-सफाई और चौबीसों घंटे चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। अस्पतालों में पूरे उपचार की प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और पशुपालकों का भरोसा भी मजबूत होगा। उपचार की गुणवत्ता की नियमित मॉनिटरिंग भी की जाएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को नहीं तय करनी पड़ेगी लंबी दूरी

पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश मेश्राम ने साेमवार काे बताया कि इस महत्वाकांक्षी योजना का विस्तार जिला स्तर से लेकर विधानसभा क्षेत्र के स्तर तक किया जाएगा। योगी सरकार पशु चिकित्सा सुविधाओं का मजबूत नेटवर्क विकसित करेगी, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के पशुपालकों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े। प्रत्येक आदर्श पशु चिकित्सालय पर तीन करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाएंगे। इसमें 2.55 करोड़ रुपये से कंस्ट्रक्शन तथा 50 लाख रुपये उपकरण, फर्नीचर, सोलर सिस्टम और अन्य पर खर्च किया जाएगा। इससे प्रदेश में पशु स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और आधुनिक होगा।

पशुओं की देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा

योजना का एक महत्वपूर्ण पक्ष मानव संसाधन का विकास भी है। सरकार केवल भवन और उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बड़ी संख्या में विशेषज्ञ चिकित्सक और पैरा वेटरनरी स्टाफ यहां तैनात होंगे। इन प्रशिक्षित कर्मियों को आधुनिक उपकरणों के संचालन, आपातकालीन उपचार, ऑपरेशन में सहयोग और पशुओं की देखभाल का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इससे चिकित्सकों को बेहतर सहयोग मिलेगा और इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

प्रदेश के डेयरी और पशुधन क्षेत्र को मिलेगी नई मजबूती

प्रदेश में पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत आधारशिला है। लाखों परिवार दुग्ध उत्पादन, डेयरी, बकरी पालन और अन्य पशुधन गतिविधियों पर निर्भर हैं। समय पर और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिलने से पशुओं की मृत्यु दर कम होगी, उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और पशुपालकों की आय में भी सकारात्मक वृद्धि होगी। साथ ही प्रदेश के डेयरी और पशुधन क्षेत्र को भी नई मजबूती मिलेगी।

उत्तर प्रदेश बन रहा पशु चिकित्सा सेवाओं का नया मॉडल

योगी सरकार की यह पहल केवल चिकित्सा सेवाओं का विस्तार नहीं है, बल्कि पशुधन संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि की दिशा में एक दीर्घकालिक निवेश भी है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध उन्नत चिकित्सा सुविधाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश देश में पशु चिकित्सा सेवाओं का नया मॉडल प्रस्तुत करने की तैयारी में है। अब प्रदेश के पशुपालकों को अपने क्षेत्र में ही ऐसी सुविधाएं मिलेंगी, जिनके लिए अब तक उन्हें बड़े शहरों का सहारा लेना पड़ता था।

By editor

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