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देहरादून, 07 अक्टूबर । मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को संस्कृत शिक्षा विभाग की समीक्षा करते हुए राज्य के संस्कृत ग्रामों में वर्षभर नियमित रूप से संस्कृत संभाषण और संस्कृत आधारित गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों को संस्कृत भाषा के साथ वेद, उपनिषद, पुराण और अन्य महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथों की जानकारी भी सरल एवं रुचिकर माध्यम से दी जाए।

मुख्यमंत्री आवास में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि संस्कृत राज्य की समृद्ध ज्ञान परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण आधार है। नई पीढ़ी को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कारों से जोड़ने में भी संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के माध्यम से बच्चों को भारतीय ज्ञान परंपरा, जीवन मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत से प्रभावी ढंग से जोड़ा जा सकता है।

उन्होंने अधिकारियों को चारधाम के अलावा हर की पैड़ी, जागेश्वर धाम, आदि कैलाश, पूर्णागिरि, सुरकंडा देवी, धारी देवी, गर्जिया देवी मंदिर और वीरभद्र ऋषिकेश सहित प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावी पहल करने के निर्देश दिए। इन स्थलों पर संस्कृत में प्रेरक वाक्य, श्लोक और उनके सरल अर्थ प्रदर्शित करने को कहा।

धामी ने कहा कि संस्कृत उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा है और इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए धन की कमी नहीं होने दी जाएगी। आगामी कुंभ के मद्देनजर उन्होंने हरिद्वार में संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत करने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक कुमार ने बताया कि राज्य के सभी 13 जिलों में एक-एक आदर्श संस्कृत ग्राम शुरू किए जा चुके हैं। इनमें संस्कृत को दैनिक बोलचाल और व्यवहार का हिस्सा बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने के लिए गार्गी संस्कृत बालिका छात्रवृत्ति, डॉ. भीमराव अंबेडकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति संस्कृत छात्रवृत्ति और संस्कृत छात्र प्रतिभा सम्मान जैसी योजनाएं संचालित हैं।

उन्होंने बताया कि संस्कृत शिक्षा, शोध, प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण एवं डिजिटलीकरण, भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक एवं शास्त्रीय अध्ययन तथा आधुनिक तकनीक में संस्कृत के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए संस्कृत आयोग के गठन की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई गई है।

बैठक में संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडेय, अपर सचिव मनुज गोयल, कवीन्द्र सिंह, संयुक्त सचिव राजेंद्र सिंह पतियाल समेत संस्कृत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

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