सात दिनों तक संस्कृत संवाद, गीत, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से गूंजा परिसर, छात्राओं ने दिखाया भाषाई कौशल
मुजफ्फरनगर। ताराचंद वैदिक पुत्री डिग्री कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का समापन समारोह उत्साह, सांस्कृतिक रंगों और संस्कृत भाषा के प्रति समर्पण के वातावरण में संपन्न हुआ। शिविर के दौरान छात्राओं ने संस्कृत भाषा को बोलचाल में अपनाने, उसके व्यावहारिक प्रयोग को समझने तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का अवसर प्राप्त किया। समापन समारोह में छात्राओं ने विभिन्न सांस्कृतिक एवं भाषाई प्रस्तुतियों के माध्यम से शिविर में अर्जित अपने ज्ञान और प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ छात्रा निशा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक ऊर्जा से भर दिया। इसके बाद छात्राओं की प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ, जिसमें संस्कृत भाषा की मधुरता और उसकी अभिव्यक्ति क्षमता का सुंदर प्रदर्शन देखने को मिला। महक ने ध्येय मंत्र का सस्वर पाठ कर उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं सलोनी द्वारा प्रस्तुत एकल गीत को भी खूब सराहना मिली। प्रियांशी के आकर्षक नृत्य ने समारोह में सांस्कृतिक रंग भर दिए और दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।
समारोह की विशेषता यह रही कि छात्राओं ने संस्कृत भाषण, गीत, संवाद एवं नाटिका के माध्यम से न केवल भाषा पर अपनी पकड़ का परिचय दिया बल्कि यह भी साबित किया कि संस्कृत आज के समय में भी व्यवहारिक और जीवंत भाषा के रूप में अपनाई जा सकती है। छात्राओं की प्रस्तुतियों में आत्मविश्वास, उच्चारण की शुद्धता और विषय की गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
शिविर का संचालन प्रशिक्षक विनीत शिवाच द्वारा किया गया। सात दिनों तक चले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में छात्राओं को संस्कृत संभाषण की सरल और प्रभावी विधियों का अभ्यास कराया गया, जिससे उनमें संस्कृत के प्रति नई रुचि और आत्मविश्वास विकसित हुआ। शिविर के दौरान भाषा को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में प्रयोग करने पर विशेष बल दिया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता चौधरी ने कहा कि संस्कृत भारतीय संस्कृति, दर्शन, साहित्य और ज्ञान परंपरा की मूल धारा है। उन्होंने कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं बल्कि भारतीय सभ्यता की पहचान है, जिसके माध्यम से देश की प्राचीन सांस्कृतिक धरोहर को समझा जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से संस्कृत भाषा के अध्ययन के साथ-साथ उसके व्यवहारिक प्रयोग को भी जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि ऐसे संभाषण शिविर नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं और संस्कृत के संरक्षण तथा संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वर्तमान समय में संस्कृत के प्रति बढ़ती जागरूकता और युवाओं की भागीदारी इस भाषा के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. संगीता चौधरी ने प्रशिक्षक विनीत शिवाच तथा शिविर में सक्रिय सहभागिता करने वाली सभी छात्राओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें निरंतर सीखने और अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया। समापन समारोह में महाविद्यालय के शिक्षकगण, छात्राएँ एवं अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।
