बेलपत्र, गंगाजल, महामृत्युंजय मंत्र और सच्ची श्रद्धा से प्रसन्न होते हैं देवों के देव महादेव, श्रावण का प्रत्येक सोमवार माना जाता है अत्यंत फलदायी
नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। भगवान शिव को समर्पित पवित्र श्रावण मास का शुभारंभ कल से होने जा रहा है। सनातन धर्म में श्रावण मास को अत्यंत पवित्र, पुण्यदायी और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला महीना माना जाता है। मान्यता है कि इस पूरे माह में भगवान भोलेनाथ की सच्चे मन से आराधना करने वाले भक्तों पर शिव की विशेष कृपा बरसती है। यही कारण है कि देशभर के शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजने लगते हैं तथा कांवड़ यात्रा के साथ पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में भगवान शिव का जलाभिषेक करने, रुद्राभिषेक कराने, व्रत रखने और शिव मंत्रों का जाप करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और आरोग्य की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि भोलेनाथ अपने नाम के अनुरूप अत्यंत भोले हैं और सच्ची श्रद्धा एवं निष्कपट भक्ति से शीघ्र प्रसन्न हो जाते हैं।
ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर भगवान शिव का ध्यान करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल, शुद्ध जल, दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद पुष्प, चंदन, अक्षत और मौसमी फल अर्पित करें। ध्यान रहे कि बेलपत्र खंडित न हो और उसकी चिकनी सतह शिवलिंग की ओर रहे।
पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का अधिक से अधिक जाप करें। साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से रोग, भय और संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र तथा रुद्राष्टकम का पाठ भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
श्रावण सोमवार का विशेष महत्व
श्रावण मास के प्रत्येक सोमवार का विशेष महत्व बताया गया है। अविवाहित युवक-युवतियां उत्तम जीवनसाथी की कामना से व्रत रखते हैं, जबकि विवाहित महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और पति की दीर्घायु के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखकर सायंकाल शिव आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करते हैं।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
श्रावण मास में सात्विक जीवनशैली अपनाने, सत्य बोलने, जरूरतमंदों की सहायता करने, गौ सेवा, अन्नदान तथा किसी भी प्रकार के नशे और तामसिक भोजन से दूर रहने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव केवल पूजन सामग्री से ही नहीं, बल्कि भक्त के निर्मल मन, सेवा, करुणा और सच्चे आचरण से भी प्रसन्न होते हैं।
हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजेंगे शिवालय
श्रावण मास के आगमन के साथ ही मंदिरों में विशेष सजावट, भजन-कीर्तन, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक का क्रम शुरू हो जाएगा। शिव भक्त कांवड़ में गंगाजल लाकर अपने आराध्य का अभिषेक करेंगे और पूरा वातावरण हर-हर महादेव तथा बम-बम भोले के उद्घोष से भक्तिमय हो उठेगा। धार्मिक आस्था है कि जो श्रद्धालु श्रावण मास में पूरे मन, वचन और कर्म से भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
