नई दिल्ली, 06 मई । उच्चतम न्यायालय ने निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका खत्म करने के केंद्र सरकार के कानून पर रोक की मांग को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई टालने से इनकार कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सुनवाई टालने की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि ये मामला देश के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इस मामले पर सुनवाई कल यानि 7 मई को भी जारी रहेगी।
मेहता ने कोर्ट से कहा कि वो फिलहाल सबरीमाला मंदिर से जुड़े नौ जजों की बेंच के सामने व्यस्त हैं। तब जस्टिस दत्ता ने कहा कि ये मामला किसी भी दूसरे विषय से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि उनके सहयोगी वकील आज नोट्स लें, लेकिन सुनवाई नहीं रुकेगी।बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कांग्रेस नेता जया ठाकुर की ओर से पेश वकील विजय हंसारिया से पूछा कि क्या कोर्ट संसद को ये निर्देश दे सकती है कि वो निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका को भी शामिल करने के लिए कानून बनाएं। कोर्ट ने कहा कि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है। तब हंसारिया ने कहा कि कोर्ट किसी भी कानून का संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत परीक्षण कर सकता है।
इस मामले में एडीआर के अलावा एक याचिका जया ठाकुर ने दायर की है। याचिका में चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश को भी रखने की मांग की गई है। इस मामले पर उच्चतम न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले कुछ वकीलों ने भी याचिका दायर कर रखी है। याचिका में उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद केंद्र सरकार की ओर से लाए गए नए कानून को चुनौती देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्तियों में देश के मुख्य न्यायाधीश को भी पैनल में शामिल करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव में पारदर्शिता लाने के मद्देनजर मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाना जरुरी है।
उच्चतम न्यायालय ने 2 मार्च, 2023 में अपने एक फैसले में कहा था कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति करने वाले पैनल में मुख्य न्यायाधीश को भी शामिल किया जाएगा। इसके बाद केंद्र सरकार द्वारा इस फैसले पर एक नया कानून बनाकर नियुक्ति प्रक्रिया में मुख्य न्यायाधीश के बजाय सरकार का एक कैबिनेट मंत्री शामिल कर दिया गया।
