prime-minister-subhashitam

प्रधानमंत्री ने सुभाषितम् साझा किया, ”उद्यमस्य प्रसादेन दृश्यन्ते विविधाः कलाः। कातरा एव जल्पन्ति यद् भाव्यं तद् भविष्यति॥” प्रधानमंत्री मोदी के एक्स हैंडल पर इसका अर्थ लिखा गया, ” परिश्रम, उद्यम और पुरुषार्थ से ही विविध कलाएं, विज्ञान, तकनीकी कौशल, शिल्प तथा नवाचार विकसित होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसलिए, मनुष्य को भाग्य के भरोसे नहीं बैठना चाहिए, बल्कि साहस, कर्मठता और निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रहना चाहिए, क्योंकि पुरुषार्थ ही भाग्य का निर्माता है।”

By editor

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Verified by MonsterInsights