नीरज प्रजापति

मुज़फ्फरनगर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व प्रत्याशी विधान परिषद गौरव कुमार जैन ने भाजपा सरकार एवं प्रदेश सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को मुज़फ्फरनगर के उस दौर को नहीं भूलना चाहिए, जब सांप्रदायिक तनाव ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया था।

उन्होंने कहा कि सत्ता परिवर्तन के लिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण को राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिशों के आरोपों और उनसे जुड़े घटनाक्रम को मुज़फ्फरनगर की जनता आज भी याद रखती है। भाजपा विधायक विक्रम सैनी को दंगा मामले से जुड़े मुकदमे में अदालत से सजा हुई और इसके परिणामस्वरूप उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई।

गौरव कुमार जैन ने कहा कि आज भी चुनावी राजनीति में यदि जनता के वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सांप्रदायिक माहौल बनाने, आरोप-प्रत्यारोप और भय की राजनीति का सहारा लिया गया तो जनता उसका लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी।

उन्होंने कहा, “भाजपा लंबे समय से आजम खान जी को लेकर गंभीर आरोप लगाती रही है, लेकिन जनता यह भी देख रही है कि राजनीतिक आरोपों और न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्यों में अंतर होता है। किसी व्यक्ति को राजनीतिक रूप से बदनाम करने के लिए आरोपों को ही सत्य की तरह प्रस्तुत करना लोकतांत्रिक राजनीति के लिए उचित नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अपने नेताओं से जुड़े मामलों में मुकदमों की वापसी और कार्रवाई के अलग-अलग मानदंडों को लेकर भी जनता के मन में सवाल हैं। ऐसे में भाजपा नेताओं को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने शासन और अपने नेताओं के आचरण का भी जवाब देना चाहिए।

गौरव कुमार जैन ने मंत्री कपिल देव अग्रवाल से अपील करते हुए कहा कि मुज़फ्फरनगर को फिर से नफरत और सांप्रदायिक तनाव की राजनीति की प्रयोगशाला न बनाया जाए। चुनाव जनता के विकास, रोजगार, शिक्षा, किसान, व्यापार, कानून-व्यवस्था और सामाजिक भाईचारे जैसे मुद्दों पर लड़ा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने हमेशा सामाजिक न्याय, लोकतांत्रिक मूल्यों और भाईचारे की राजनीति को आगे बढ़ाने की बात की है। आज प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और आने वाले चुनाव में जनता अपने मत के माध्यम से भाजपा की नीतियों और नफरत की राजनीति का जवाब देने के लिए तैयार है।

गौरव कुमार जैन ने कहा, “जनता अब सब समझती है। झूठ, डर और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण के सहारे जनता को लंबे समय तक गुमराह नहीं किया जा सकता। इस बार चुनाव में मुद्दे होंगे और फैसला जनता का होगा। लोकतंत्र में अंतिम शक्ति जनता के वोट की होती है और जनता हर अन्याय का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से देगी।”

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