नीरज प्रजापति

राणा चौक, जानसठ बाईपास और भोपा बाईपास पर मायके जाने को घंटों इंतजार करती रहीं महिलाएं, बसें आती रहीं, मगर रुकने का नाम नहीं लिया; कई बहनों के भाइयों की कलाई रह गई सूनी

मुजफ्फरनगर। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं को बड़ी राहत देते हुए रोडवेज बसों में 27 अगस्त से 29 अगस्त की मध्यरात्रि तक महिला यात्रियों और उनके एक सहयोगी के लिए निःशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई, ताकि बहनें आसानी से अपने मायके पहुंचकर भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकें। लेकिन मुजफ्फरनगर में इस व्यवस्था की जमीनी हकीकत ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
शहर के राणा चौक, जानसठ बाईपास और भोपा बाईपास सहित कई स्थानों पर महिलाएं अपने मायके जाने के लिए रोडवेज बसों का इंतजार करती नजर आईं। महिलाओं का आरोप है कि बसें उनके सामने से गुजरती रहीं, लेकिन कई चालक बसों को रोकने के बजाय रफ्तार बढ़ाकर आगे निकल गए। घंटों इंतजार के बाद भी जब बसें नहीं रुकीं तो महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा।
रक्षाबंधन के अवसर पर मायके जाने के लिए घरों से निकली महिलाओं के लिए यह महज एक यात्रा नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ा भावनात्मक अवसर था। कई महिलाएं हाथों में राखी और सामान लेकर बस स्टॉप पर खड़ी रहीं और हर आती हुई रोडवेज बस को उम्मीद भरी नजरों से देखती रहीं। बस दिखाई देती तो महिलाएं उसे रोकने का प्रयास करतीं, लेकिन आरोप है कि कई बस चालक बिना रुके सीधे अपने गंतव्य की ओर निकल गए।
महिलाओं का कहना था कि सरकार ने जब यात्रा निशुल्क की है तो उन्हें इसका लाभ भी मिलना चाहिए। कुछ महिलाओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वे किराया देकर भी मायके जाने को तैयार हैं, लेकिन कम से कम बस चालक बस तो रोकें। उनका कहना था कि मुफ्त यात्रा की घोषणा से उन्हें उम्मीद जगी थी कि रक्षाबंधन पर घर पहुंचना आसान होगा, लेकिन बसें न रुकने के कारण उनकी परेशानी और बढ़ गई।
सबसे ज्यादा पीड़ा उन महिलाओं को हुई जो लंबे इंतजार के बावजूद अपने पीहर नहीं पहुंच सकीं। महिलाओं का आरोप है कि परिवहन निगम के अधिकारियों और बस चालक-परिचालकों की लापरवाही के कारण सरकार की सुविधा का उद्देश्य ही प्रभावित हो गया। कई महिलाओं ने इसे सरकारी आदेश की खुलेआम अनदेखी बताया।
इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर कई वीडियो भी वायरल होने की बात सामने आई है। वायरल वीडियो में महिलाएं रोडवेज व्यवस्था को लेकर अपना आक्रोश जाहिर करती दिखाई दे रही हैं। महिलाओं का कहना है कि जब सरकार ने विशेष रूप से रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को सुविधा देने का फैसला किया था तो परिवहन व्यवस्था को भी उसी के अनुरूप मजबूत किया जाना चाहिए था।
महिलाओं का कहना है कि जब सरकार ने महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा दी थी, तो क्या परिवहन निगम के स्थानीय अधिकारियों ने यह सुनिश्चित किया कि बसें प्रमुख स्टॉपों पर यात्रियों को लेने के लिए रुकें? यदि नहीं, तो सरकारी योजना का लाभ आखिर उन महिलाओं तक कैसे पहुंचेगा, जिनके लिए यह सुविधा शुरू की गई थी?
महिलाओं का कहना है कि सरकारी घोषणा कागज पर मुफ्त हो सकती है, लेकिन अगर बस ही नहीं रुके तो सफर मुफ्त होने का कोई मतलब नहीं। अब देखना यह है कि वायरल वीडियो और महिलाओं की शिकायतों के बाद परिवहन निगम के जिम्मेदार अधिकारी मामले का संज्ञान लेते हैं या रक्षाबंधन पर सामने आई इस अव्यवस्था को भी अनदेखा कर दिया जाएगा।

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