नीरज प्रजापति
आर्य समाज शिवपुरी में विशेष यज्ञ के साथ मनाया गया वैदिक पर्व, सदस्यों ने धारण किया नया यज्ञोपवीत, रक्षा सूत्र के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला
खतौली। आर्य समाज शिवपुरी में शुक्रवार को रक्षाबंधन का वैदिक पर्व श्रद्धा, उत्साह और वैदिक संस्कारों के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विशेष यज्ञ से हुई, जिसमें वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आहुतियां प्रदान कर सुख-शांति, समृद्धि और समाज में भाईचारे की कामना की गई। इसके उपरांत आर्य समाज के सदस्यों को विधि-विधानपूर्वक नया यज्ञोपवीत धारण कराया गया। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में प्रधान आर्य प्रतिनिधि सभा मुजफ्फरनगर के सत्येंद्र आर्य ने रक्षाबंधन के वैदिक स्वरूप और उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन मूल रूप से भाई-बहन के प्रेम और परस्पर सुरक्षा की भावना का पर्व है। वैदिक परंपरा में इसे ‘रक्षा सूत्र’ के रूप में देखा जाता है। प्राचीन काल में शिष्य गुरु को रक्षा सूत्र बांधते थे और गुरु अपने ब्रह्मचारियों को रक्षा सूत्र प्रदान करते थे। आज भी पंडितों द्वारा यजमानों की कलाई पर कलावा बांधकर संरक्षण एवं मंगल की कामना की जाती है।
सत्येंद्र आर्य ने बताया कि रक्षाबंधन की परंपरा केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे के प्रति कर्तव्य, संरक्षण और विश्वास का प्रतीक है। उन्होंने पुराणकालीन तथा ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि विभिन्न कालखंडों में रक्षा सूत्र को संकट के समय सहायता और सुरक्षा के संकल्प से जोड़ा गया है।
उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण की उंगली से रक्त निकलने पर द्रौपदी द्वारा अपने वस्त्र का टुकड़ा बांधने की कथा भी रक्षा और आत्मीयता की भावना को दर्शाती है। इसी प्रकार मध्यकाल में रानी कर्णावती द्वारा हुमायूं को राखी भेजे जाने का प्रसंग भी रक्षा सूत्र की व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक अवधारणा से जोड़ा जाता है।
उन्होंने कहा कि रक्षा सूत्र सामाजिक भेदभाव से ऊपर उठकर प्रेम और संरक्षण का संदेश देता है। निर्धन-धनी, कमजोर-बलवान, पंडित-यजमान, प्रजा-राजा, पत्नी-पति, माता-पुत्र तथा भाई-भाई सहित कोई भी व्यक्ति दूसरे की मंगलकामना और सुरक्षा के संकल्प के साथ रक्षा सूत्र बांध सकता है।
इससे पूर्व कुमारी सारा कालान के यजमानत्व में विशेष यज्ञ संपन्न कराया गया। अजेश आर्य एवं भगवान सिंह आर्य पुरोहित रहे। यज्ञ के बाद सभी सदस्यों को नया यज्ञोपवीत धारण कराया गया।
कार्यक्रम में जगदीश प्रधान, रामानंद आर्य, अनिल आर्य, विकास आर्य, सुशील आर्य, भगवान सिंह आर्य, अजेश आर्य, धीरेंद्र आर्य, शोभाराम आर्य, राजेंद्र खारी, पूर्व स्टेशन अधीक्षक प्रणव आर्य, राजकुमार, शशिपाल, रणसिंह आर्य, चरण सिंह आर्य, दक्षिता आर्य, निरोक्षा खंडेलवाल, दीपक आर्य, संगीता, सोनाक्षी, सतीश विश्वकर्मा, विक्रम सिंह, अनुज आर्य सहित बड़ी संख्या में आर्य समाज के सदस्य मौजूद रहे।
