नीरज प्रजापति
15 दिन से ज्ञापन देने के बावजूद सुनवाई नहीं होने का आरोप, सैकड़ों कर्मचारियों ने सीएमओ कार्यालय पर डाला डेरा; कई कर्मचारी संगठनों ने भी दिया समर्थन।
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संविदा कर्मचारियों ने लंबित मांगों के समाधान को लेकर गुरुवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय पर धरना शुरू कर दिया। जिलेभर के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों से पहुंचे सैकड़ों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा। एनएचएम संविदा कर्मचारी संगठन का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर पिछले करीब 15 दिनों से लगातार ज्ञापन और अधिकारियों के माध्यम से अपनी बात शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा था, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण कर्मचारियों को धरने पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ा। कर्मचारियों ने कहा कि वर्षों से स्वास्थ्य विभाग में सेवाएं देने के बावजूद उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। धरने को संबोधित करते हुए एनएचएम संगठन के जिलाध्यक्ष डा. सचिन जैन ने कहा कि संविदा कर्मचारी लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। उनका कहना है कि कई कर्मचारी करीब 15 वर्षों से विभाग में सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद उनके भविष्य और सेवा संबंधी मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। कर्मचारियों ने नियमितीकरण, वेतन संबंधी समस्याओं और अन्य लंबित मांगों का समाधान कराने की मांग उठाई। आंदोलन को अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी संगठनों का भी समर्थन मिला। राजकीय नर्सिंग ऑफिसर संगठन की अध्यक्ष सरिता सिंह ने धरने पर पहुंचकर एनएचएम संविदा कर्मचारियों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया। आशा संगठन की जिलाध्यक्ष निर्मला चौधरी ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि आशा कार्यकर्ता और संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी कड़ी हैं और उनकी समस्याओं का समाधान होना चाहिए। डिप्लोमा फार्मेसी एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष मनोज त्यागी ने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने जरूरत पड़ने पर फार्मासिस्ट संगठन के भी आंदोलन में शामिल होने की बात कही। मिनिस्ट्रियल एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पाकेश कुमार ने भी धरने को समर्थन देते हुए लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग की। धरने में जिला महिला चिकित्सालय, जिला चिकित्सालय पुरुष, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से जुड़े बड़ी संख्या में संविदा कर्मचारी शामिल हुए। कर्मचारियों के आंदोलन से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका के बीच अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और शासन की ओर टिक गई हैं। कर्मचारियों ने दो टूक कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
