
खतौली। नगर पालिका परिसर में शुक्रवार रात आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा शायरी के साथ-साथ अव्यवस्थाओं और सभासदों की नाराजगी को लेकर भी चर्चा में रहा। मेला श्रावणी के तहत आयोजित कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से नामचीन शायर पहुंचे थे, लेकिन मुशायरे का मुख्य दौर शुरू होने से पहले अतिथियों और सहयोगियों के स्वागत का सिलसिला इतना लंबा चला कि मंच पर बैठे शायरों के साथ दूर-दराज से आए मेहमान भी परेशान नजर आए। कार्यक्रम में देरी के चलते मुख्य अतिथि भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत के भी मुशायरा शुरू होने से पहले ही लौट जाने की चर्चा रही।
कार्यक्रम का आगाज रात करीब दस बजे हुआ। इसके बाद मंच पर अतिथियों और सहयोगियों के स्वागत एवं सम्मान का क्रम शुरू हुआ। एक-एक कर अतिथियों को मंच पर बुलाया जाता रहा और यह सिलसिला काफी देर तक चलता रहा। मुख्य कार्यक्रम में शायरों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। दर्शक भी शायरी शुरू होने का इंतजार करते रहे।
दूर-दराज से आईं एक महिला शायरा ने मंच से स्वागत कार्यक्रम की लंबाई पर चुटकी लेते हुए कहा कि खतौली का मुशायरा तीन दिन का होना चाहिए। दो दिन केवल स्वागत के लिए रखे जाएं और तीसरे दिन शायरों को अपना कलाम पढ़ने का मौका मिले। उनकी इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी स्वागत समारोह की अवधि को लेकर चर्चा होने लगी।
सम्मान को लेकर सभासदों में नाराजगी
मुशायरे के दौरान नगर पालिका के कई सभासदों की नाराजगी भी खुलकर सामने आई। सभासदों का आरोप था कि उन्हें न तो मंच पर आने का अवसर दिया गया और न ही मंच से बुलाकर सम्मानित किया गया। इससे नाराज कई सभासदों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया और वहां से चले गए।
बहिष्कार करने वालों में हाजी वसीम, मास्टर सत्तार, अमित त्यागी, कमल वर्मा, डॉ. मोहम्मद हारुन, अजय कुमार, आस मोहम्मद, सौरभ जैन, दिमाग सिंह तथा नामित सभासद मनोज सैनी आदि शामिल रहे। सभासदों के कार्यक्रम से चले जाने के बाद यह मामला देर रात तक मुशायरे में चर्चा का विषय बना रहा।
देर से शुरू हुआ शायरी का दौर
स्वागत कार्यक्रम और विवाद के बीच आखिरकार मुशायरे का मुख्य दौर शुरू हुआ। शायरों ने अपनी-अपनी शैली में गजलें और शेर पेश कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। वसीम राजपुरी ने अपने कलाम से तालियां बटोरीं। उन्होंने पढ़ा—
बहनों का हक हड़प लिया मियां, हज तो कर लिया,
जन्नत के बदले आप तो दोजख में आ गए।
डॉ. सदर ने कहा—
मैं शायर हूं, मोहल्ला का गजल जागीर है मेरी,
मैं इस पर फख्र करता हूं, यही तकदीर है मेरी।
दानिश गजल ने अपने कलाम में कहा—
मोती किसी सागर में न तुम जैसा मिल सका,
आंखों ने रख दिए हैं समंदर कंगाल कर।
मेरठ से आईं शायरा हिमांशी बाबरा ने पढ़ा—
दिलों के रिश्ते दिल जलते हैं,
खून पीते हैं खून के रिश्ते।
अलीगढ़ से आईं मुमताज नसीम का कलाम भी श्रोताओं को पसंद आया—
तुझे इसकी कोई खबर नहीं, ये मेरे सुकून की बात है,
मेरी जिंदगी का सवाल है, तेरे एक फोन की बात है।
बिलाल सहारनपुरी ने पढ़ा—
पहले हर आदमी इंसान हुआ करता था,
बाद में हिंदू मुसलमान हुआ करता था।
यमन मंजर ने कहा—
खुद को इतनी बड़ी सजा दूंगा,
जिंदगी, तुझको भुला दूंगा।
वहीं खुर्शीद ने पढ़ा—
प्यार की जब तारीख लिखोगे,
पहला नाम हमारा होगा।
मुंबई से आए शकील आदमी ने अपने अंदाज में कहा—
परों को खोल, जमाना उड़ान देखता है,
जमीन पर बैठकर क्या आसमान देखता है।
देवबंद से आए डॉ. नदीम शाह को भी श्रोताओं की ओर से सराहना मिली। जहाज देवबंदी ने अपने हास्य अंदाज में पढ़ा—
जो कहे साले, वही मंजूर होना चाहिए,
सास के आगे जरा मजबूर होना चाहिए।
मुंबई से आए शायर अफरीदी ने कहा—
मुझको महफिल से उठाने में सफल हो जाओगे,
क्या समझते हो कि तुम मेरा बादल हो जाओगे।
मुशायरे का संचालन मोइन शादाब ने किया। उनके शेरों पर भी श्रोताओं ने खूब दाद दी—
हमारे आंसुओं की किस कदर तौहीन की उसने,
किसी के सामने रोकर बहुत पछता रहे हैं हम।
पालिका अध्यक्ष हाजी शाहनवाज लालू ने भी अपने शेर पेश किए, जिन्हें श्रोताओं ने पसंद किया।
मुख्य अतिथि के लौटने की भी रही चर्चा
कार्यक्रम में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम शुरू होने में देरी होने के कारण उनके मुशायरा शुरू होने से पहले ही वहां से लौट जाने की बात सामने आई। देर रात तक कार्यक्रम के दौरान उनके लौटने की चर्चा होती रही।
मुशायरे के आयोजन में संयोजक मंडल के सदस्य सोनू फरीदी, परवेज गाजी, कुमार ठेकेदार, हाजी जमीरउद्दीन, हाजी नुसरत मनी समेत अन्य लोगों का सहयोग रहा।
देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे शायरों ने देर रात तक अपने कलाम पेश किए और श्रोताओं को बांधे रखा। हालांकि शायरी की महफिल में जहां शायरों ने अपनी रचनाओं से खूब दाद बटोरी, वहीं कार्यक्रम की शुरुआत में हुआ लंबा स्वागत समारोह, सभासदों की नाराजगी और मुख्य अतिथि के लौटने का मामला भी पूरे आयोजन में चर्चा का प्रमुख विषय बना रहा।
