नीरज प्रजापति
मुजफ्फरनगर। रविवार की शाम फुगाना थाना क्षेत्र के गांव हबीबपुर सीकरी में जो कुछ हुआ, उसने पूरे मुजफ्फरनगर ही नहीं बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। चंद पलों में एक हंसता-खेलता परिवार मौत की आगोश में समा गया। जिस कच्चे मकान की चारदीवारी के भीतर बच्चों की किलकारियां गूंज रही थीं, उसी मकान ने कुछ ही सेकंड में अपनों को हमेशा के लिए अपने मलबे के नीचे दफन कर दिया।
जब तक कोई कुछ समझ पाता, मिट्टी, ईंट और लकड़ियों से बना जर्जर मकान तेज धमाके के साथ भरभराकर ढह चुका था। घर के भीतर मौजूद परिवार के सदस्य मलबे के नीचे दब गए और पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई।
धमाके जैसी आवाज सुनते ही आसपास के ग्रामीण अपने घरों से दौड़ पड़े।
किसी ने फावड़ा उठाया, किसी ने बेलचा, तो कोई नंगे हाथों से ही मलबा हटाने लगा। हर किसी की आंखों में एक ही उम्मीद थी कि शायद कोई सांस अभी भी बाकी हो।
लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। घंटों तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद जब एक-एक कर शव बाहर निकाले गए तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं। पूरा गांव सिसक उठा और मातम की चादर पूरे इलाके पर छा गई।

इस भीषण हादसे में परिवार के मुखिया इस्लाम (60 वर्ष), रुखसार (10 वर्ष), अहद (5 वर्ष), अलसीबा (4 वर्ष) और एक वर्षीय जीशान की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं रुकईया (8 वर्ष) और समईया (7 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गईं। दोनों बच्चियों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टर उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं।
कुछ ही सेकंड में खत्म हो गई जिंदगी की सारी खुशियां
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रविवार की शाम परिवार अपने रोजमर्रा के कामों में व्यस्त था। बच्चे घर के भीतर खेल रहे थे और परिवार के अन्य सदस्य भी वहीं मौजूद थे। अचानक तेज आवाज आई और देखते ही देखते पूरा मकान ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर पड़ा। किसी को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिला। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसके रोंगटे खड़े हो गए। कुछ ही सेकंड में पूरा परिवार मलबे के नीचे दब चुका था।
मासूमों की चीखें सुनकर दौड़ पड़ा पूरा गांव
मकान गिरने की आवाज सुनकर गांव के लोग घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े। हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार राहत कार्य में जुट गया। महिलाओं की चीखें और बच्चों के रोने की आवाजें पूरे माहौल को गमगीन बना रही थीं। कई ग्रामीणों ने अपने हाथों से मिट्टी हटाई, तो कुछ ने औजारों की मदद ली। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि मलबे के नीचे इतना बड़ा दर्द छिपा होगा।
जेसीबी से हटाया गया मलबा, घंटों चला रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही फुगाना थाना प्रभारी दीपक चौधरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग और प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं। भारी मलबे को हटाने के लिए तत्काल जेसीबी मशीनें बुलाई गईं। पुलिस, प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर कई घंटे तक लगातार राहत एवं बचाव अभियान चलाया। एक-एक ईंट और मिट्टी हटाकर दबे लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन पांच लोगों की जान नहीं बचाई जा सकी।
घटनास्थल पर पहुंचे डीएम, एसएसपी, मंडलायुक्त और डीआईजी

हादसे की सूचना मिलते ही जिलाधिकारी उमेश मिश्रा और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने राहत एवं बचाव कार्य की निगरानी करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। देर रात सहारनपुर मंडलायुक्त डॉ. रुपेश कुमार तथा सहारनपुर परिक्षेत्र के डीआईजी अभिषेक सिंह भी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता दिलाने का भरोसा दिलाया।

मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक
घटना की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए अधिकारियों को घायलों का समुचित उपचार कराने और पीड़ित परिवार को हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से पूरे मामले की रिपोर्ट तलब करते हुए राहत कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरतने के भी निर्देश दिए।
गांव में पसरा मातम, हर आंख हुई नम
सोमवार सुबह गांव का माहौल पूरी तरह गमगीन दिखाई दिया। जिस घर से रोज बच्चों की हंसी सुनाई देती थी, वहां अब सिर्फ सिसकियां और मातम था। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव की महिलाओं की चीखें सुनकर हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। अंतिम दर्शन के दौरान पूरा गांव उमड़ पड़ा। हर कोई यही कह रहा था कि ऐसा दर्दनाक हादसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा।
एक हादसा, जिसने कई सवाल खड़े कर दिए
यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि जर्जर और कच्चे मकानों में रहने वाले हजारों गरीब परिवारों की हकीकत भी सामने लाता है। बरसात के मौसम में ऐसे मकानों के गिरने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर जर्जर मकानों को लेकर चेतावनी दी जाती है, लेकिन आर्थिक मजबूरी के कारण अनेक परिवार ऐसे ही मकानों में रहने को विवश हैं। यह घटना उन परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
जांच शुरू, सहायता की प्रक्रिया तेज
प्रशासन ने मकान गिरने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी टीम पूरे मामले की जांच करेगी। वहीं पीड़ित परिवार को शासन की ओर से नियमानुसार आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक जानकारी को ही सही मानें।
हबीबपुर सीकरी कभी नहीं भूल पाएगा यह दर्द
रविवार की यह शाम गांव हबीबपुर सीकरी के इतिहास में एक ऐसे काले अध्याय के रूप में दर्ज हो गई, जिसे शायद ही कोई कभी भूल पाए। कुछ ही सेकंड में पांच जिंदगियां खत्म हो गईं, एक परिवार बिखर गया और मासूम बच्चों की किलकारियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं। पीछे रह गए हैं तो सिर्फ टूटे सपने, रोते-बिलखते अपने और वह मलबा, जिसने एक पूरे परिवार की खुशियों को हमेशा के लिए अपने भीतर दफन कर लिया।
